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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर वन भूमि की सुरक्षा ताक पर, अतिक्रमण की आशंका

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वन विभाग बिलासपुर ने मामले में एनएचएआई को भेजा अंतिम नोटिस
बार-बार चेतावनी के बाद भी प्राधिकरण ने नहीं सुधारे गायब पिलर
सीमा स्तंभों की मरम्मत और पुनर्स्थापना न करने पर होगी कानूनी कार्रवाई
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अंतिम मंजूरी में सीमा स्तंभों की स्थापना जरूरी

सरोज पाठक
बिलासपुर। कीरतपुर–नेरचौक राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण कार्य के दौरान परिवर्तित की गई वन भूमि में लगाए जाने वाले आरओडब्ल्यू (राइट ऑफ वे) आरसीसी सीमा स्तंभों के लापता और क्षतिग्रस्त होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इसको लेकर हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
उप वन संरक्षक, वन प्रभाग बिलासपुर ने एनएचएआई को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए सभी लापता और क्षतिग्रस्त सीमा स्तंभों की तत्काल मरम्मत और दोबारा स्थापन के निर्देश दिए हैं। वन विभाग के अनुसार कार्यालय आदेश के तहत एसीएफ, बिलासपुर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इस समिति को कीरतपुर–नेरचौक खंड के लिए डायवर्ट की गई वन भूमि में लगाए गए आरओडब्ल्यू आरसीसी सीमा स्तंभों का भौतिक सत्यापन करने का जिम्मा सौंपा गया था। समिति ने विस्तृत निरीक्षण के बाद 1 जनवरी 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्सों में सीमा स्तंभ या तो पूरी तरह गायब हैं या फिर क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़े हैं। हैरानी की बात यह रही कि पिछले कई महीनों से एनएचएआई को बार-बार पत्र और अनुस्मारक भेजे जाने के बावजूद कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट में चेताया है कि सीमा स्तंभों का न होना भविष्य में वन भूमि पर अतिक्रमण का बड़ा कारण बन सकता है। आरओडब्ल्यू स्तंभ ही यह तय करते हैं कि सड़क परियोजना के अंतर्गत कितनी भूमि वन विभाग की है और कितनी गैर-वन क्षेत्र में आती है। इनके अभाव में न केवल अवैध कब्जों का खतरा बढ़ता है, बल्कि वन भूमि की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। वन विभाग ने एनएचएआई की इस लापरवाही को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी अंतिम स्वीकृति की शर्त संख्या-18 का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। इस शर्त के तहत परियोजना एजेंसी को निर्देश दिए गए थे कि डायवर्ट की गई वन भूमि की स्पष्ट पहचान के लिए सभी सीमा स्तंभ सुरक्षित, दुरुस्त और स्थल पर स्थापित किए जाएं।
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उप वन संरक्षक कार्यालय ने बताया कि इस विषय पर पहले भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला। विभाग ने 6 जनवरी 2026 को स्पष्ट शब्दों में निर्देश जारी किए हैं कि कीरतपुर–नेरचौक खंड के सभी लापता और क्षतिग्रस्त आरसीसी सीमा स्तंभों की तत्काल मरम्मत और दोबारा स्थापन किया जाए। पत्र में यह भी चेताया गया है कि यदि निर्देशों की अवहेलना जारी रही तो संबंधित अधिनियमों और नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले की प्रतिलिपि मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर को भी भेजी गई है। उनसे आग्रह किया गया है कि वे एनएचएआई के परियोजना निदेशक, पीआईयू मंडी को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करें, ताकि वन भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। संवाद
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इनसेट
सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि से जुड़ा है प्रोजेक्ट
कीरतपुर से नेरचौक खंड में फोरलेन निर्माण के लिए बिलासपुर वन प्रभाग के अंतर्गत लगभग 69.87 हेक्टेयर से 74.78 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्सन किया गया है। इसमें ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट के साथ दो लेन सड़क को पक्के शोल्डर सहित फोरलेन में तब्दील करने का कार्य शामिल है। वन विभाग के कड़े रुख के बाद अब निगाहें एनएचएआई पर टिकी हैं। यदि तय समय में सीमा स्तंभों की मरम्मत औ दोबारा स्थापन नहीं की गई, तो मामला कानूनी कार्रवाई और परियोजना पर प्रशासनिक शिकंजे तक जा सकता है।
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