बरमाणा (बिलासपुर)। सदर विस क्षेत्र की करीब 9 ग्राम पंचायतों के लिए पंजगाईं में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है। क्षेत्र की हजारों की आबादी आपात सेवाओं और प्राथमिक उपचार के लिए इस अस्पताल पर निर्भर है। लेकिन हालात यह है कि छुट्टी वाले दिन अस्पताल में लोगों को आपात सेवाएं नहीं मिल पाती हैं और जिला अस्पताल बिलासपुर का रुख करना पड़ता है। सरकार ने अस्पताल को सीएचसी का दर्जा तो दे दिया है लेकिन सिर्फ दो डॉक्टर तैनात किए हैं।
छुट्टी वाले दिन अस्पताल में सुविधा मिलना न मिलना स्टाफ पर निर्भर करता है। ऐसा ही मामला रविवार को सामने आया। कुनणु गांव के निवासी आशीष गौतम का 2 साल का बच्चा घर में गिर गया। उसके सिर पर चोट आई। आशीष अपने बेटे को इलाज के लिए पंजगाईं सीएचसी ले आया। लेकिन वहां पर मौजूद फार्मासिस्ट ने यह कहकर इलाज करने से मना कर दिया कि यहां बच्चों को टांके लगाने के लिए उपकरण नहीं हैं। बच्चे के परिजनों ने फार्मासिस्ट से कहा कि बता दें कि क्या उपकरण चाहिए, बाहर से ले आएंगे। लेकिन बाद में उन्हें जवाब मिला कि बच्चे को टांके लगाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने चिकित्सक से भी फोन पर बात की, लेकिन उन्होंने कहा कि 24 घंटे सेवाएं देने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसके बाद परिजनों ने निजी क्लिनिक में बच्चे के सिर पर चार टांके लगवाए।
इस अस्पताल के तहत ग्राम पंचायत हरनोड़ा, बरमाणा, बैरी रजादियां, जमथल, धौन कोठी, पंजगाईं, धार टटोह, द्रोबड़ और सोलग जुरासी पंचायत का क्षेत्र आता है। सदर विस क्षेत्र की अंतिम पंचायत हरनोड़ा के गांव पाटी से जिला अस्पताल की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। अन्य पंचायतों से भी यह सफर 20 से 30 किलोमीटर है। अगर यहां कोई आपात स्थिति होती है तो लोग पंजगाईं अस्पताल का रुख करते हैं।
अस्पताल में बच्चे को टांक लगाने के लिए नहीं थे उपकरण : डॉ. जगदीप
सीएचसी पंजगाईं के चिकित्सक डॉक्टर जगदीप बरार ने बताया कि 24 घंटे आपात ड्यूटी पर रहते हैं। रविवार को फार्मासिस्ट अस्पताल में था, वह प्रशिक्षित है। बच्चे को टांके लगाने के लिए अस्पताल में आवश्यक उपकरण नहीं थे। इसी वजह से परिजनों को सामान बाहर से लाने को कहा गया। परिजनों ने बच्चे का बाहर ही इलाज करवा दिया।
लापरवाही नहीं होगी बर्दास्त : उपायुक्त
उपायुक्त पंकज राय ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य को लेकर कोई लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य संस्थानों में आपात ड्यूटी देना चिकित्सकों का दायित्व है। सीएमओ से इस बारे में बात करेंगे।