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Bilaspur News: गवाहों को दोबारा बुलाने की मांग पर राहत नहीं

Tue, 24 Feb 2026 11:20 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अदालत से
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जिला जज ने खारिज की महिला की अपील
ट्रायल कोर्ट का आदेश रखा बरकरार

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला न्यायाधीश की अदालत ने झंडूता क्षेत्र की एक महिला की ओर से दायर सिविल विविध अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस आदेश को चुनौती दी गई थी, उसके खिलाफ दायर यह अपील कानून के तहत विचारणीय नहीं थी, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
मामले के अनुसार झंडूता के डाहड गांव की महिला ने सिविल जज झंडूता के 30 सितंबर 2024 को पारित आदेश को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने उनके उस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें वादियों के गवाहों को दोबारा बुलाकर जिरह (क्रॉस एग्जामिनेशन) करने की अनुमति मांगी गई थी। अपील में कहा गया कि जब वादियों के गवाहों के बयान दर्ज किए गए, उस समय अपीलकर्ता को एकपक्षीय कर दिया गया था। बाद में आदेश 9 नियम 7 सीपीसी के तहत एकपक्षीय आदेश निरस्त कर दिया गया, लेकिन गवाहों से जिरह का अवसर नहीं दिया गया। इसके बाद धारा 151 सीपीसी के तहत गवाहों को वापस बुलाने का आवेदन दायर किया गया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया। अपीलकर्ता का तर्क था कि इससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ और उन्हें मुकदमे का प्रभावी ढंग से बचाव करने का अवसर नहीं मिला। प्रतिवादियों ने अपील का विरोध करते हुए कहा कि आवेदन काफी देरी से केवल कार्यवाही लंबित करने के उद्देश्य से किया गया था। निचली अदालत ने रिकॉर्ड और अपीलकर्ता के आचरण को देखते हुए उचित विवेक का प्रयोग किया है। जिला न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि आदेश 43 नियम 1 (आर) सीपीसी के तहत अपील केवल अस्थायी निषेधाज्ञा (ऑर्डर 39 नियम 1 और 2) से जुड़े मामलों में ही संभव है, जबकि वर्तमान मामला धारा 151 सीपीसी के तहत गवाहों को वापस बुलाने के आवेदन से संबंधित है। इसलिए यह अपील विचारणीय नहीं बनती।
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अदालत ने यह भी माना कि अपीलकर्ता को एकपक्षीय आदेश हटने के बाद कार्यवाही में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिले थे। केवल लागत जमा करने से गवाहों को दोबारा बुलाने का दोबारा अधिकार नहीं बनता। मुकदमे के उन्नत चरण में गवाहों को दोबारा बुलाने से अनावश्यक देरी होती और प्रतिवादियों को नुकसान पहुंचता। अदालत ने अपील खारिज करते हुए 30 सितंबर 2024 के आदेश को सही ठहराया और कहा कि इसमें कोई कानूनी त्रुटि या अनियमितता नहीं है। साथ ही स्पष्ट किया कि इस आदेश का मुख्य दीवानी वाद के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पक्षकारों को 30 मार्च 2026 को ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करेंगे और सभी लंबित आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए हैं।
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