बापू दूरे न देयां ओ परदेसे, न देयां तुसां जो कसम लगे गुरुदेव दी... संस्कार गीतों की प्रस्तुति से महिला मंडल पट्टा के कलाकारों ने दर्शकों को प्राचीन लोक विरासत से रूबरू करवाया। लोक कलाकारों ने राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले में कहलूर लोकोत्सव में खूब समां बांधा। इस अवसर पर जिला के वरिष्ठ लोक गायक भगवान दास ने मेले लगी गए लूहणू रे मैदाने ओ लोको मेले लगी गए... गीत की प्रस्तुती देकर जनसमूह का मनोरंजन किया। कहलूर लोकोत्सव के दूसरे दिन 25 सांस्कृतिक दलों, महिला मंडलों के 200 से भी अधिक कलाकारों ने पारंपरिक वेश-भूषा, लोक वाद्य यंत्रों तथा लोक गीतों एवं लोक नृत्यों के माध्यम से लोक विरासत की मनोहारी छटा बिखेर कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इस अवसर पर उपायुक्त एवं राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला समिति की अध्यक्षा मानसी सहाय ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहीं । जिला भाषा अधिकारी डॉ. अनीता शर्मा ने कहलूर लोकोत्सव के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन जिला के महिला मंडल देवली, हरीदास जनूउ कोट, अनुकंचन, कृष्णु राम पार्टी पजैलकलां, तानिया चंदेल मंडी मानवां ने जहां लोक भजन तथा लोक गाथा की प्रस्तुतियां दीं, वहीं महिला मंडल मगरोट, स्वयं सहायता समूह चैहड़, महिला मंडल भटेड़ ऋषीकेश, महिला मंडल सांई, महिला मंडल कसेह, महिला मंडल मंडी मानवा, महिला मंडल चकली, महिला मंडल बलड़ा, महिला मंडल दोल्हा ब्राह्मणा, भोले शंकर स्वयं सहायता समूह बलड़ा ने बिलासपुरी गिद्दा प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। इसके अतिरिक्त पुष्पा देवी एवं साथी, सोनू देवी एवं सहेलियों, मां जालपा स्वयं सहायता समूह सिहड़ा, टकरेड़ा से बनिता एवं सहेलियां, शिवानी, अंजना, सुरभी तथा जय पाल चंदेल ने भी लोक गीतों एवं नृत्यों की प्रस्तुतियां देकर समां बांधा।