-सुन्हाणी के शिव गौरी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। विकासखंड झंडूता की ग्राम पंचायत सुन्हानी के नागा बाबा कुटिया शिव गौरी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कथावाचक पंडित राधा रमन शास्त्री ने भक्त प्रहलाद का प्रसंग सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप अपने भाई की मौत का बदला भगवान विष्णु से लेने के लिए ब्रह्मा जी की तपस्या करने के लिए एक वृक्ष के नीचे बैठ गया। देव गुरु बृहस्पति तोते के रूप में वृक्ष पर बैठ गए और नारायण के नाम की रट लगाने लगे। हिरण्यकश्यप तपस्या छोड़कर घर आ गया। उनकी पत्नी ने पूछा कि आप तपस्या छोड़कर क्यों चले आए तो तोता की बात बताई। पत्नी ने भी भगवान के नाम का जप किया और गर्भ ठहर गया। भक्त प्रहलाद के रूप में बालक का जन्म हुआ। जब प्रहलाद गुरुकुल से घर आए तो हिरण्यकश्यप ने पूछा कि क्या शिक्षा ग्रहण की। प्रहलाद भगवान का गुणगान करने लगे। इससे हिरण्यकश्यप क्रोधित हो उठा। उन्होंने कहा कि तुम मेरे शत्रु का गुणगान कर रहे हो। प्रहलाद ने भगवान की आराधना नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप अत्याचार करता रहा और भगवान प्रहलाद को बचाते रहे। एक दिन हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद से कहा कि तुम्हारे भगवान कहां हैं। प्रहलाद ने जवाब दिया कि कण-कण में और इस खंभे में भी हैं। इतना सुनते ही हिरण्यकश्यप ने तलवार निकालकर खंभे पर वार कर दिया। तब नरसिंह के रूप में भगवान प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं। उन्होंने कहा कि अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि रावण, कंस और हिरण्यकश्यप को उसका अहंकार ही ले डूबा था। इसलिए हमें हमेशा अहंकार से बचना चाहिए। इस अवसर पर मंदिर के महंत बाबा अभयगिरी जी महाराज सहित अन्य उपस्थित रहे।