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Bilaspur News: कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुनाया वर्णन

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-श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित
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संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। उपमंडल झंडूता के प्रसिद्ध श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर आनंद घाट में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण यज्ञ के पांचवें दिन पंडित संदीप शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया।
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उन्होंने कहा कि जो दुष्ट अत्याचारी समाज के लिए भार, जहर बन जाए ऐसे अपने ही कर्म से अल्पआयु में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। दानवों का दमन करना भगवान श्री कृष्ण ने बाल्यावस्था से ही प्रारंभ कर दिया था। सर्वप्रथम भगवान ने उस दुष्ट पूतना का वध किया जो छल कपट करके दूसरों का अहित करने वाली थी। भगवान ने अघासुर बकासुर आदि दानवों का वध करके कालीदह में छलांग लगाकर यमुना जी के जल को दूषित करने वाले कालिया नाग का भी दमन करके उसे रमणक द्वीप में भेज दिया। भगवान श्री कृष्ण ने समस्त ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को धारण किया। जब भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन में बंसी बजाते थे तो पशु, पक्षी, जीव-जंतु सभी प्राणी उनकी बंसी को सुनकर मोहित हो जाते थे। ब्रज की गोपियां भगवान श्रीकृष्ण को वन जाते हुए और आते हुए निहारने के लिए रास्ते में खड़ी रहा करती थीं। मां भवानी कात्यायनी मंदिर में प्रार्थना करती थी कि श्रीकृष्ण उन्हें पति रूप में प्राप्त हो जाए। भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा की रात्रि में समस्त गोपियों को अपनी बंसी की धुन में तान छेड़ कर बुलाया और वृंदावन में दिव्या रस कर गोपियों का मनोरथ पूर्ण किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और कथाओं को सुनने से मन की मलिनता दूर होती है। संतुष्ट जीवन ही समृद्ध जीवन है। उन्होंने कहा कि नवरात्र का छठा दिन मां कात्यायनी का होता है जो भी भक्त अपनी मनोकामना के लिए मां भगवती दुर्गा कात्यायनी की उपासना करता है। भगवान नारायण उनके ऊपर प्रसन्न होते हैं।
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