- शिकायत के बावजूद बंदरों को पकड़ने के लिए नहीं हो रही कार्रवाई
-विभाग नहीं कर पाया है बंदर पकड़ने का सवा तीन लाख का भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। सदर खंड की स्याहोला पंचायत के गांव उपरला स्याहोला, मंझोत और पंधोह में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। बंदरों ने न केवल फसलों को बर्बाद किया, बल्कि अब बच्चों और महिलाओं पर भी हमले करना भी शुरू कर दिया है। ग्रामीण नकदी फसलें उगाकर अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन बंदरों की वजह से फसलें चौपट हो रही हैं।
वन विभाग से बार-बार शिकायत के बावजूद बंदरों को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। विभाग का कहना है कि उनके पास बंदरों को पकड़ने के लिए बजट नहीं है। जिले में करीब 31,000 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है, जिससे अधिकांश लोग अपनी जीविका चलाते हैं। लेकिन दिन में बंदर और रात में जंगली सूअर व बेसहारा गोवंश फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग द्वारा बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए हमीरपुर, ऊना और सलापड़ में नसबंदी केंद्र चलाए जाते हैं। लेकिन बजट की कमी के कारण नसबंदी अभियान ठप पड़ा है। इससे बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
बंदर पकड़ने वाले उत्तर प्रदेश के शब्बीर अली ने कहा कि पिछले साल के 70 हजार रुपये और इस साल के 2.50 लाख रुपये के बिलों का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। वन विभाग एक बंदर पकड़ने के 700 रुपये देता है, लेकिन भुगतान न होने के कारण शब्बीर ने बंदर पकड़ने से मना कर दिया है। ग्रामीण प्रेमचंद, पूर्व प्रधान मुंशी राम, ठाकुर मनोहर लाल, बलदेव शर्मा, इंद्र कुमार और जगत राम ने वन विभाग से बंदरों को जल्द पकड़ने की अपील की है। वन विभाग के सदर रेंज अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि बजट आते ही बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बंदर पकड़ने वाले का पिछला बकाया चुकता न होने के कारण काम रुका हुआ है।