-स्वास्थ्य विभाग ने की मनोरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति
- मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी पर एक साल से लटका था ताला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लंबे समय के बाद आखिरकार क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में मनोरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हो गई है। अभी तक मानसिक रोगियों के उपचार की जिले में एम्स को छोड़ कर कहीं कोई सुविधा नहीं है। लेकिन जल्द ही क्षेत्रीय अस्पताल में ही मानसिक रोगियों को उनके उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी।
अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार मानसिक रोग या अवसाद से ग्रसित कई लोग अस्पताल पहुंचे हैं। लेकिन मनोरोग विशेषज्ञ नहीं होने से उन्हें बिना काउंसलिंग के ही वापस जाना पड़ता रहा है। इसके अलावा चिट्टा जैसे नशे की लत में फंस चुके कई युवा भी इससे बाहर निकलने के लिए मनोरोग विशेषज्ञ की तलाश में क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन उन्हें भी निराशा ही मिलती है। अब जल्द ही मनोरोग विशेषज्ञ की सेवाएं क्षेत्रीय अस्पताल में ही मिलना शुरू हो जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने आईजीएमसी से एसआर शिप पूरी करने वाले मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आयुष शर्मा की नियुक्त क्षेत्रीय अस्पताल में की है। बता दें कि क्षेत्रीय अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ का एक पद स्वीकृत है, जो करीब एक साल खाली चल रहा है। अस्पताल में ओपीडी भवन की तीसरी मंजिल में मनोरोग विशेषज्ञ का कमरा स्थापित तो किया गया है, लेकिन वहां ताला लगा रहता है। इससे लोगों को बिना उपचार ही वापस लौटना पड़ता है। जिले में चिट्टे जैसा नशा भी गांव-गांव तक फैल चुका है। कई अभिभावक अपने बच्चों को इस दलदल से निकालना चाहते हैं, जिसके लिए मनोरोग विशेषज्ञ जरूरी हैं। साथ ही कई युवा स्वयं भी नशा छोड़ना चाहते हैं। अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति से अभिभावकों और भटके हुए युवाओं को इसका लाभ मिलेगा। इसलिए मनोरोग विशेषज्ञ की नियुक्त की मांग भी लगातार सामाजिक संस्थाओं और लोगों की ओर से की जा रही थी।
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चिकित्सकों के पांच पद अभी भी खाली
क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में चिकित्सकों के 29 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में पांच पद खाली चल रहे हैं। अस्पताल में एनेस्थीसिया, एमडी चिकित्सक के एक-एक पद खाली हैं। वर्तमान में एक ही एमडी और एक ही एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की सेवाएं मिल रही हैं। इनके छुट्टी जाने पर मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।