आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में आठ महीने से दवाइयों का टोटा चल रहा है। इस वजह से स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को बिना दवाइयों के ही लौटना पड़ रहा है। लोगों की मांग के बावजूद स्वास्थ्य विभाग केंद्रों में दवाइयों उपलब्ध करवाने में नाकाम साबित हो रहा है।
रामू राम, रूप लाल, विधी चंद, सतबंत सिंह, मदन लाल, नरेश कुमार, प्रवीण कुमार, वासुदेव, राजेश कुमार, बलदेव दास, कृष्ण चंद, सुशील कुमार, नंदकिशोर, देशराज, विशाल ठाकुर, संजय कुमार, बाबू राम और राजेंद्र गौतम सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वह स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज के लिए गए, लेकिन केंद्र पर कोई भी दवाई उपलब्ध नहीं थी। इस कारण उनको प्राइवेट केमिस्टों से दवाई लेनी पड़ी।
ये दवाइयां नहीं उपलब्ध
आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केन्द्रों में जहां मरीजों को विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए मिलने वाली अश्वगंधा, कृमिहर वटी, कामदुधा रस, आनंद भैरव रस, पाईलैक्स, सिस्टोन, एकांगवीर रस, योगराज गुगल, कैसोर गूगल, त्रयोदसांग गूगल, अशोक रिष्ट, दसमुला, अरगुणारिष्ट, अव्यरिष्ट, रासनादि क्वाथ, मधुशष्टि, तुलसीयादि, वरूणादि सहित पट्टियों का टोटा चल रहा है। इससे आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कई बार आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों से दवाइयां खत्म होने की सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी गई, लेकिन आज दिन तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। नाम न छापने की शर्त पर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों ने बताया कि वह मरीजों के लिए कुछ दवाइयां अपने पैसे से खरीदकर बाहर से ला रहे हैं, ताकि मरीजों का विश्वास आयुर्वेद पर बना रहे।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों का शीघ्र प्रबंध किया जाए। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले अधिकारियों ने दस मार्च तक सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में सप्लाई भेजने की बात कही थी, लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों में अभी तक सप्लाई नहीं भेजी गई है। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. रमेश कुमार ने बताया कि कुछ दवाइयां आ गई हैं। इनकी सप्लाई एक अप्रैल से सभी आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में कर दी जाएगी।