सर्जरी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी से कैंसर का उपचार संभव
एम्स के विशेषज्ञ कैंसर उपचार के लिए मरीजों को कर रहे जागरुक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कैंसर के बहुआयामी उपचार में मेडिकल ऑन्कोलॉजी की भूमिका अहम है। बहुआयामी उपचार कैंसर के प्रभावशाली इलाज के लिए कई चिकित्सीय दृष्टिकोणों के उपयोग को संदर्भित करता है। इसमें आमतौर पर सर्जरी, विकिरण चिकित्सा, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, लक्षित थेरेपी और हार्मोन थेरेपी का संयोजन शामिल होता है।
बहुआयामी उपचार का लक्ष्य तरीकों का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना, विभिन्न कोणों से रोग को लक्षित करना और दुष्प्रभावों को कम करते हुए संभावित रूप से परिणामों में सुधार करना है। इन सभी उपचार को लेकर एम्स बिलासपुर के विशेषज्ञ लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इनका कहना है कि सर्जरी से कैंसर के ट्यूमर और आसपास के ऊतकों को हटाया जाता है। अगर किसी मरीज को ठोस ट्यूमर है तो सर्जरी उसके उपचार की पहली लाइन है। खासकर अगर कैंसर शरीर के अन्य भागों में नहीं फैला है। वहीं विकिरण चिकित्सा में कैंसर कोशिकाओं को मारने या ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए उच्च ऊर्जा विकिरण का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग अकेले उपचार के रूप में, सर्जरी या कीमोथेरेपी के संयोजन में किया जा सकता है। कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है। इम्यूनोथेरेपी से शरीर की प्रतिरक्ष प्रणाली को बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने में मदद करती है। यह कुछ प्रकार के कैंसर के लिए विशेष रूप से प्रभावी हो सकता है, जिनमें मेलेनोमा और फेफड़ों का कैंसर शामिल है। लक्षित थेरेपी से सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना विशिष्ट कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन पर हमला करने के लिए दवाओं या अन्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। यह अक्सर उन कैंसर के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें विशिष्ट आनुवंशिक उत्परिवर्तन होते हैं। वहीं, हार्मोन थेरेपी का उपयोग कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है। जो हार्मोन संवेदनशील होते हैं, जैसे स्तन और प्रोस्टेट कैंसर। यह शरीर के कुछ हार्मोन के उत्पादन को अवरुद्ध करके या कैंसर कोशिका के विकास को संकेत देने के लिए हार्मोन की क्षमता में हस्तक्षेप करके काम करता है।
इनसेट
मेडिकल ऑन्कोलॉजी के कुछ प्रमुख पहलू
निदान- मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट कैंसर के निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे कैंसर की उपस्थिति की पुष्टि करने, इसके प्रकार और चरण का निर्धारण करने और रोग की सीमा का आकलन करने के लिए अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों जैसे पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और सर्जन के साथ मिलकर काम करते हैं। वहीं, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट कैंसर के प्रकार, चरण, रोगी के समग्र स्वास्थ्य और वरीयताओं और नवीनतम साक्ष्य आधारित दिशा-निर्देशों जैसे कारकों के आधार पर कैंसर रोगियों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना विकसित करते हैं।
कोट
मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट नैदानिक अनुसंधान में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं और नए कैंसर उपचार, दवा संयोजन या उपचार दृष्टिकोण का मूल्यांकन करने के लिए नैदानिक परीक्षण कर सकते हैं। कुल मिलाकर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट कैंसर रोगियों की व्यापक देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं मरीजों को चाहिए कि वह अपने डॉक्टर के कहे अनुसार उपचार कराएं, तो वह कैंसर जैसी बीमारी को भी उक्त उपचार पद्धति से मात दे सकते हैं।
-डॉ. प्रवेश धीमान, सह प्राध्यापक एवं संकाय प्रभारी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, एम्स