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टीबी रोगियों की पहचान के लिए मैपिंग पापुलेशन शुरू : डॉ. सिंगला

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मधुमेह, धूम्रपान करने वाले, उच्च रक्तचाप समेत 17 श्रेणियों के रोगी शामिल
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टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज को दी जाएगी प्रीवेंटिव मेडिसिन
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य खंड मारकंड के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक सिंगला ने कहा कि भारत को क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने के लिए 7 दिसंबर से 24 मार्च तक 100 दिन का विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, आशा वर्कर संभावित टीबी रोगियों की पहचान के लिए मैपिंग पाॅपुलेशन कर रहे हैं। स्क्रीनिंग के बाद संदिग्ध लक्षणों वाले व्यक्तियों के स्पूटम (बलगम) के सैंपल जांच के लिए उठाए जा रहे हैं।
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मैपिंग में 17 श्रेणियां मधुमेह रोगी, धूम्रपान करने वाले, उच्च रक्तचाप वाले रोगी, कैंसर के रोगी, गुर्दे रोग के रोगी, मदिरापान करने वाले, कुपोषित व्यक्ति, पिछले 5 वर्ष में टीबी से ग्रसित रोगी, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले, वृद्धाश्रम, हॉस्टल, जेल आदि में रहने वाले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, रात को पसीना आना, खून की उल्टी, छाती में दर्द, सांस फूलना, वजन कम होना, भूख में कमी, थकान, गले या अन्य जगहों पर सूजन। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण पाए जाते हैं, तो उसका सैंपल नजदीकी डीएमसी में भेजा जाएगा। जिन व्यक्तियों में लक्षण नहीं हैं, उनका छाती का एक्स-रे अनिवार्य है। एक्स-रे और बलगम में टीबी रोगाणु न मिलने पर साई टीबी टेस्ट किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज को प्रीवेंटिव मेडिसिन दी जाएगी। यह प्रक्रिया टीबी की पहचान शुरुआती स्तर पर ही कर लेती है। इससे समाज में इसके फैलाव को रोका जा सकेगा। डॉ. सिंगला ने पंचायत प्रतिनिधियों, चिकित्सा अधिकारियों, सीएचओ, हेल्थ वर्कर और आशा वर्कर से अपील की कि वे इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। अन्य विभागों के कर्मचारियों से भी इस मुहिम में योगदान की अपील की गई है।
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साई टीबी क्या है
साई टीबी एक आधुनिक जांच प्रक्रिया है, जो लेटेंट टीबी (छुपी हुई क्षय रोग) की पहचान के लिए उपयोग की जाती है। लेटेंट टीबी एक ऐसी अवस्था है, जिसमें व्यक्ति के शरीर में टीबी के जीवाणु (बैक्टीरिया) होते हैं, लेकिन ये सक्रिय नहीं होते और व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते। हालांकि भविष्य में ये जीवाणु सक्रिय होकर रोग का कारण बन सकते हैं।
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