भदसीं गांव में एक वर्ष पहले हुए भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुआ था मकान
राहत के नाम पर मिली केवल तिरपाल, सुरक्षा दीवार भी नहीं बनी
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)।।उपतहसील भराड़ी की ग्राम पंचायत गतवाड़ के भदसीं गांव में भूस्खलन से जर्जर हुए एक मकान को एक वर्ष बीत जाने के बाद भी राहत और पुनर्वास का इंतजार है। भारी बारिश के दौरान हुए भूस्खलन से क्षतिग्रस्त मकान में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और छह कमरों का यह भवन पूरी तरह रहने योग्य नहीं रह गया है।
बरसात का मौसम दोबारा शुरू होने से प्रभावित परिवार की चिंता और बढ़ गई है। भदसीं निवासी अनिल कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष लगातार हुई मूसलाधार बारिश के दौरान मकान के समीप भारी भूस्खलन हुआ था। इससे मकान की नींव कमजोर हो गई और दीवारों में गहरी दरारें पड़ गईं। स्थिति ऐसी हो गई कि मकान में रहना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया। उन्होंने बताया कि घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल सका। परिवार की सुरक्षा को देखते हुए अनिल कुमार अपनी पत्नी और स्कूल में पढ़ने वाली दो बेटियों के साथ दधोल क्षेत्र में किराये के कमरे में रहने को मजबूर हैं। सीमित आय होने के कारण किराये का अतिरिक्त बोझ उठाना उनके लिए कठिन साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि कभी-कभार जरूरी सामान लेने या मकान की स्थिति देखने गांव जाना पड़ता है, लेकिन मकान के भीतर जाने से भी डर लगता है। बरसात के दौरान मकान के पूरी तरह ढहने का खतरा लगातार बना हुआ है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि राहत के नाम पर अब तक केवल एक तिरपाल उपलब्ध करवाई गई, जो पूरी छत को ढकने के लिए पर्याप्त नहीं है। बारिश का पानी मकान के भीतर पहुंच जाता है, जिससे भवन की स्थिति और खराब होती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय पर आर्थिक सहायता मिल जाती तो अब तक नया मकान बन चुका होता और परिवार को किराये के कमरे में रहने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ती।
अनिल कुमार ने बताया कि मकान के समीप सुरक्षा दीवार (डंगा) लगाने की मांग भी कई बार उठाई गई, ताकि भविष्य में होने वाले भूस्खलन को रोका जा सके। हालांकि, अब तक इस दिशा में भी कोई कार्य शुरू नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि यदि इस वर्ष भी भारी बारिश हुई तो मकान पूरी तरह धराशायी हो सकता है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से प्रभावित परिवार को प्राथमिकता के आधार पर आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने और मकान के पास सुरक्षा कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में देरी नहीं होनी चाहिए।
इनसेट
सिर्फ तिरपाल से नहीं हो रहा गुजारा
परिवार का कहना है कि राहत के नाम पर मिली एक तिरपाल न तो पूरी छत को ढक पा रही है और न ही बारिश से मकान की सुरक्षा कर रही है। इससे हर बारिश के साथ मकान के और अधिक क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है।
कोट
अनिल कुमार का मकान रहने योग्य नहीं है। बजट का प्रावधान होते ही मकान निर्माण की प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी।
अजय शर्मा, उप प्रधान, ग्राम पंचायत गतवाड़