डिग्री कॉलेजों के प्रवक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। अब कॉलेज के प्रवक्ताओं को सप्ताह में 26 घंटों के स्थान पर 16 से 18 घंटे ही पढ़ाना होगा। इसके अलावा सरकार की ओर से एमफिल और पीएचडी धारकों की विशेष इंक्रीमेंट भी बहाल कर दी गई है।
यह इंक्रीमेंट पहली अक्तूबर 2014 के बाद प्रदेश सरकार ने बंद कर दी थी। हिमाचल राजकीय कॉलेज प्राध्यापक संघ के उपाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों की ओर से संबंधित मांगों का ज्ञापन 7 सितंबर को सदर विधायक बंबर ठाकुर के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा गया था। खास बात यह है कि इसी दिन विधायक ने मुख्यमंत्री के आयोजित शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की मीटिंग में लंबित मांगों को पूरा भी करवा दिया है।
इसमें अब प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रोफैसर के पद भी सृजित होंगे। अभी तक यह व्यवस्था लागू नहीं थी। केवल असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति मिलती थी। इसके बाद प्राचार्य के अलावा कोई पदोन्नति नहीं थी। मगर भविष्य में असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के बाद उन्हें प्रोफेसर पद पर भी पदोन्नति मिलेगी।
इस बारे में जल्द ही सरकार अधिसूचना जारी करेगी। यह बात वीरवार को सदर विधायक एवं प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद सदस्य बंबर ठाकुर ने अनऔपचारिक बातचीत के दौरान कही।
उन्होंने बताया कि एमफिल-पीएचडी करने वालों की स्पेशल इंक्रीमेंट भी बहाल हो गई है। कॉलेज प्रोफेसर को भी प्राचार्य की तर्ज पर प्रोमोशन के लिए बगैर एनुअल परफॉरमेंस इंडीकेटर (एपीआई) के वन टाइम रिलेक्सेशन मिलेगी।
यूजीसी मानकों को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालयों में गुणात्मक शिक्षा बढ़ाने के लिए नए कॉलेज प्राध्यापकों के पद सृजित किए जाएंगे। प्रत्येक महाविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के मद्देनजर आधारभूत संरचना को भी बढ़ाया जाएगा।
सीएम सहित अन्य का किया आभार प्रकट
हिमाचल राजकीय कॉलेज प्राध्यापक संघ ने लंबित मांगों को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदेश के सभी कॉलेज प्राध्यापकों की तरफ से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, सदर बिलासपुर के विधायक बंबर ठाकुर और अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा)आरडी धीमान धन्यवाद व्यक्त किया है।
कॉलेज प्रवक्ताओं की समस्याओं को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल सीएम से 7 सितंबर को मिला था। इस दौरान प्रवक्ताओं को पेश आ रही विभिन्न मांगों सीएम के समक्ष रखा गया है। प्रवक्ताओं की मांगों को मान लिया गया है।
बंबर ठाकुर, विधायक एवं सदस्य कार्यकारी परिषद प्रदेश विश्वविद्यालय