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एक साल में 54 फीसदी गिरी कृषि भूमि की सरकारी कीमत, किसानों में रोष

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स्वारघाट (बिलासपुर)। भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन के तहत टाली, भटेड़ और दगड़ाहण गांव में एक साल में जमीन का सर्किल रेट 54 फीसदी कम हुआ है। इससे भू मालिकों में रोष है। 31 मार्च 2021 तक इस जमीन का सर्किल रेट 19.53 लाख रुपये था। जोकि अब 9 लाख रुपये रह गया है। किसानों का कहना है कि पिछले एक वर्ष में हर वस्तु की कीमत दोगुनी हो गई, लेकिन हिमाचल की कृषि भूमि जिसकी उपलब्धता कुल क्षेत्रफल का मात्र 17 फीसदी है की कीमत सरकारी रिकॉर्ड में 54 फीसदी गिर गई।
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रेलवे भू अधिग्रहण प्रभावित विस्थापित होने वाले किसानों ने गांव टाली में सदाराम ठाकुर की अध्यक्षता में बैठक की। इसमें 4 गांवों के लगभग 60 किसानों ने भाग लिया। किसानों का कहना है कि उनकी सोना उगलती जमीनों को विभिन्न परियोजनाओं के लिए कौड़ियों के भाव हड़पने के लिए सरकार भू माफिया की तरह कार्य कर रही है। 2013-14 में इन गांवों का सर्किल रेट 10 लाख 50,000 रुपये था। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन प्रभावितों को वर्ष 2013-14 में 21 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से मुआवजा दिया गया था। जिसे बाद में न्यायालय द्वारा लगभग 36 लाख रुपये प्रति बीघा कर दिया गया। इसी भूमि में से फोरलेन बन रही है। कुछ दूरी पर एम्स और हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज आदि परियोजनाएं प्रगति पर हैं। जमीनों की उपलब्धता नाममात्र है। भूमि के सर्किल रेट कम करना किसानों के साथ सरासर धोखा और सोची समझी साजिश है।
किसानों ने मांग की है कि सरकार इस गलत कदम को तुरंत वापस ले और सही सर्किल रेट निर्धारित करे। कृषि भूमि का उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने रेलवे विस्थापित एवं प्रभावित किसान समिति बनाने और अन्य क्षेत्रों के प्रभावितों के साथ लामबंद होने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। बैठक में रणवीर सिंह, मंगल सिंह, गोरखी राम, हीरालाल, राजेश, रूप सिंह, सुखराम, सुरेंद्र सोनी, श्रीराम, देशराज धीमान, नारायण सिंह, चौधरी राम, ब्रह्मानंद आदि 60 किसानों ने भाग लिया। एसडीएम एवं भू अर्जन अधिकारी रामेश्वर ने कहा कि भू अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 26 के अनुसार और सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों व तय मापदंडों को ध्यान में रखते हुए भूमि के रेट तय किया जाता है। अगर लोग संतुष्ट नहीं हैं तो उनकी मांग को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
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