मामले की जांच के लिए तकनीकी अधिकारी नियुक्त करने का भी किया आग्रह
318 मकानों को मिला है परियोजना में मुआवजा, मौके पर अब भी मौजूद हैं अधिकांश भवन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित मकानों को लेकर भू-अर्जन अधिकारी, विशेष भू-अधिग्रहण इकाई बिलासपुर ने एनएचएआई (पीआईयू) मंडी को पत्र भेजकर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मकानों की छानबीन के लिए तिथि तय करने का आग्रह किया है। यह पत्र तीन मई को भेजा गया है।
पत्र में उल्लेख है कि इससे पहले भी 22 अप्रैल को इस विषय पर पत्र भेजा गया था, लेकिन तिथि निर्धारित न होने के चलते अगली कार्रवाई रुकी हुई है। अपील संख्या 11-27/24 और 28-44/25 को लेकर यह पत्र जारी किया गया है। अधिकारी ने परियोजना निदेशक को तकनीकी अधिकारी नियुक्त करके समय सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया है। बताते चलें कि तकनीकी अधिकारी की नियुक्ति के बिना यह तय करना मुश्किल होगा कि उक्त भवन अधिग्रहीत जमीन के अंदर हैं या नहीं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार किरतपुर से नेरचौक और नेरचौक से पंडोह तक परियोजना के तहत कुल 318 मकानों का मुआवजा आवंटित किया जा चुका है। लेकिन मुआवजा आवंटन और परियोजना तैयार होने के बाद भी डैहर से पंडोह तक और गरा से बलोह तक यह मकान मौके पर मौजूद हैं। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति मामले को लेकर उच्च न्यायालय गई है। समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट को दिए गए शपथपत्र में एनएचएआई के परियोजना निदेशक ने केवल छह मकानों के मौके पर मौजूद होने की बात कही है। इनमें से चार मकान ध्वस्त, एक मकान से जुड़ी याचिका विचाराधीन तथा एक मकान मौके पर मौजूद बताया गया है।
भू अर्जन अधिकारी के अनुसार कुछ भवन स्वामियों ने अपने मकानों का कुछ भाग तोड़कर मरम्मत की है, जिससे यह तय करना कठिन हो गया है कि भवन नया है या अधिग्रहण से पूर्व का। पटवार सर्कल अमरपुर-बकरोआ ने कुछ मकानों के मौके पर मौजूद होने की पुष्टि की है, पर ये मकान अधिग्रहण क्षेत्र से बाहर बताए गए हैं। वहीं, पटवार सर्कल रोहिण और मल्यावर की रिपोर्ट में मकानों को ध्वस्त बताया गया है। इसके विपरीत, विद्युत उपमंडल कंदरौर की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मकानों के बिजली व जल कनेक्शन अभी तक चालू हैं।