खुद ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है लोगों की समस्याएं हल करने वाले अधिकारी
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने की थी एसडीएम कार्यालय की घोषणा
कार्यालय में रिकॉर्ड रूम की सुविधा नहीं, अव्यवस्थित हैं महत्वपूर्ण दस्तावेज
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता(बिलासपुर)। उपमंडल झंडूता का एसडीएम कार्यालय आज भी खुद के भवन से वंचित है। करीब एक दशक से यह कार्यालय तहसील कार्यालय के कुछ कमरों में अस्थायी रूप से संचालित हो रहा है, जिससे अधिकारियों व कर्मचारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों की समस्याएं हल करने वाले अधिकारी खुद ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
अप्रैल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह ने झंडूता को एसडीएम कार्यालय की सौगात दी थी। इसके बाद 8 दिसंबर 2016 को वीरभद्र सिंह ने एसडीएम कार्यालय का उद्घाटन किया और लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी की। हालांकि उस समय झंडूता में तहसीलदार का पद खाली था, जिस कारण एसडीएम को तहसीलदार के कमरे से ही कार्यभार संभालना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि उद्घाटन के करीब नौ साल बाद भी न तो एसडीएम के लिए अलग से चैंबर उपलब्ध हो पाया है और न ही कोर्ट रूम या आवासीय सुविधा। आज भी एसडीएम को एक छोटे से कमरे में बैठकर काम करना पड़ता है। कार्यालय में रिकॉर्ड रूम की सुविधा नहीं है, जिससे महत्वपूर्ण दस्तावेज अव्यवस्थित रूप से पड़े हैं। स्थिति इतनी खराब है कि कार्यालय के दरवाजे और खिड़कियां जर्जर हो चुकी हैं, फर्श भी टूट रहा है। कमरों में पर्दे तक नहीं लगे हैं। कर्मचारियों को बैठने की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। वे तहसील कर्मचारियों के टेबल-कुर्सी का उपयोग कर किसी तरह अपना काम चला रहे हैं।
एसडीएम को उपमंडल स्तर के अधिकारियों के साथ बैठक करने के लिए मीटिंग हॉल तक उपलब्ध नहीं है। कर्मचारियों की मानें तो एसडीएम कार्यालय के नाम पर केवल नाममात्र की सुविधाएं ही उपलब्ध हैं, जबकि व्यावहारिक स्तर पर यह कार्यालय मूलभूत सुविधाओं के लिए आज भी जूझ रहा है। वहीं इस कारण लोगों को भी अपने काम कराने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द एसडीएम कार्यालय के लिए अलग भवन का निर्माण करवाया जाए, ताकि जनता को बेहतर प्रशासनिक सेवाएं मिल सकें और कर्मचारियों को भी कार्य करने के लिए उचित माहौल मिल सके।