कहा, मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को आपदा से हुए नुकसान का दिया था विस्तृत ब्योरा
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में नौवां बजट पेश किया, जिससे हिमाचल सरकार और प्रदेशवासियों को अनेक अपेक्षाएं थीं। हालांकि, बजट में प्रदेश में हाल के वर्षों में आई भीषण प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसी विशेष राहत पैकेज का उल्लेख न होने को तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
धर्माणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भौगोलिक और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील राज्य है, जहां जलवायु परिवर्तन और मौसम के असामान्य बदलावों के कारण बार-बार प्राकृतिक आपदाएं सामने आ रही हैं। इन आपदाओं से प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। ऐसे में पर्यावरण सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के मद्देनजर केंद्र सरकार की ओर से विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक था, लेकिन बजट में इसकी अनदेखी निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार वन संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सतत विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। वहीं, भाखड़ा बांध जैसे राष्ट्रीय महत्व के परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश का अहम योगदान रहा है, जिससे देश को हरित क्रांति, सिंचाई सुविधा और बिजली उत्पादन के रूप में बड़ा लाभ मिला है। इसके बावजूद आपदा की मार झेल रहे प्रदेश के लिए राहत पैकेज की घोषणा न होना केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।
धर्माणी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं प्री-बजट बैठक में शामिल हुए थे और मुख्यमंत्री सुक्खू ने भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट कर हिमाचल प्रदेश की समस्याओं और आपदा से हुए नुकसान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया था। उस दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा बजट में आपदा राहत पैकेज शामिल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अंतिम बजट घोषणा में इसका कोई उल्लेख नहीं मिला। मंत्री ने कहा कि इस विषय पर गहन अध्ययन की आवश्यकता है कि क्या यह निर्णय किसी राजनीतिक प्रभाव या सीमित क्षमता के कारण लिया गया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह हिमाचल प्रदेश की परिस्थितियों को गंभीरता से समझते हुए शीघ्र ही आपदा राहत के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करे, ताकि प्रभावित जनता को वास्तविक राहत मिल सके।