- अधर में लटके हाइड्रो पावर प्लांट को पूरा करने के लिए साथ में मिलकर करना होगा काम
हिमाचल को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने के लिए प्रदूषण रहित ऊर्जा को बढ़ावा देना भी सही
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने हिमाचल की ऊर्जा नीति में सुधार की वकालत की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने की बात कर रही है। हिमाचल को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने के लिए प्रदूषण रहित ऊर्जा को बढ़ावा देना सही है, लेकिन हाइड्रो एनर्जी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि हजारों मेगावाट क्षमता के हाइड्रो पावर प्लांट अधर में लटके हुए हैं। उन्हें पूरा करने के लिए त्वरित कार्रवाई के साथ ही दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है। इससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। मंगलवार को धर्मशाला में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ऊर्जा के स्रोत विषय पर अपने विचार रखते हुए जीतराम कटवाल ने कहा कि हिमाचल में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1990 के बाद से काफी काम हुआ है। इसके बावजूद ग्रिड एनर्जी प्रोडक्शन में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। जाहिर है कि प्रदेश की ऊर्जा नीति में खामी है। मुख्यमंत्री ने अपने पहले बजट भाषण में सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सोलर पावर प्लांट्स पर 40 फीसदी सब्सिडी देने की घोषणा की थी। हाल ही में उन्होंने ऊना में सोलर पावर प्लांट का शिलान्यास भी किया है। हिमाचल को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने की दिशा में यह भी एक अच्छा प्रयास है, लेकिन केवल इसी पर फोकस करना ठीक नहीं है। सोलर एनर्जी से पैदा होने वाली बिजली की प्रोडक्शन लगभग पूरी तरह से मौसम पर निर्भर करती है। बरसात में इस प्रोडक्शन में कमी आना स्वाभाविक है। सोलर और विंड एनर्जी से पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने का खर्च भी अधिक है।
जीतराम कटवाल ने कहा कि ग्रिड को स्टेबल बनाने का काम हाइड्रो एनर्जी सही ढंग से कर सकती है। ऐसे में सोलर एनर्जी के साथ हाइड्रो एनर्जी पर भी पूरी गंभीरता से काम होना चाहिए। प्रदेश में 10-11 हजार मेगावाट क्षमता के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट स्थापित हुए हैं। लगभग 27 हजार मेगावाट क्षमता के अन्य प्रोजेक्ट चिन्हित हुए हैं, जबकि लगभग 10 हजार मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। किसी भी देश और प्रदेश का विकास काफी हद तक एनर्जी पर निर्भर करता है। इससे होने वाली आय तथा रोजगार का जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए सरकार को हाइड्रो एनर्जी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऊर्जा नीति में सुधार करना बेहद जरूरी है। बेहतर होगा कि सरकार इस मामले में अड़ियल रवैया अपनाने के बजाए दलगत राजनीति की भावना से ऊपर उठकर काम करे।