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Bilaspur News: भाखड़ा विस्थापितों की 65 वर्ष बाद भी नहीं सुलझीं समस्याएं, नवंबर में निकालेंगे रैली

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कोटधार क्षेत्र की ग्राम पंचायत मलराओं के गाह-घोड़ी में आयोजित बैठक में मौजूद भाखड़ा विस्थापित।।
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नवंबर में एसडीएम कार्यालय झंडूता के बाहर जुटेंगे विस्थापित, राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेजेंगे ज्ञापन
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जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने बैठक में आंदोलन का लिया फैसला

संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। भाखड़ा बांध बनने के 65 वर्ष बाद भी विस्थापित परिवार मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए सरकारों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। समस्याओं का स्थायी समाधान न होने से नाराज जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने अब आंदोलन का निर्णय लिया है। समिति नवंबर में एसडीएम कार्यालय झंडूता के बाहर विस्थापितों की विशाल रैली करेगी। इसके बाद एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति और राज्यपाल को ज्ञापन भेजा जाएगा। रविवार को कोटधार क्षेत्र की ग्राम पंचायत मलराओं के गाह-घोड़ी में गरजा राम की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई। समिति अध्यक्ष देश राज शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में विस्थापित परिवारों की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलदेव ठाकुर, राज कुमार, श्री राम चौहान, प्रेम सिंह राणा, बालक राम, ओंकार सिंह चंदेल, कुंजू राम, मंजू देवी, जय राम, नंद लाल और ब्यासा देवी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
समिति सदस्यों ने कहा कि 65 वर्षों से विस्थापित परिवार अपनी मांगें सरकारों के समक्ष उठाते आ रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसके कारण कई परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नवंबर में प्रस्तावित रैली को लेकर विस्थापित बहुल गांवों में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। समिति पदाधिकारी गांव-गांव जाकर लोगों को रैली में शामिल होने के लिए प्रेरित करेंगे।
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जमीन का मालिकाना हक और सुविधाएं देने की मांग
समिति ने भाखड़ा विस्थापित बहुल क्षेत्रों का बंदोबस्त करवाकर कब्जे वाली भूमि का मालिकाना हक देने की मांग की। विस्थापितों और प्रभावितों के काटे गए बिजली-पानी के कनेक्शन जल्द बहाल करने तथा बिजली और पेयजल की सुविधा निशुल्क उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई गई। गोबिंदसागर झील से पीने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने की मांग की गई। विस्थापित परिवारों के बच्चों को बीबीएमबी और अन्य सरकारी सेवाओं में उचित आरक्षण और प्राथमिकता देने की मांग भी रखी गई। परियोजना से पैदा होने वाली बिजली की रॉयल्टी का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विस्थापित क्षेत्रों के विकास पर खर्च करने की मांग की गई।
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प्लॉट और पुलों के निर्माण का मुद्दा उठाया
समिति ने शेष विस्थापित परिवारों को जल्द प्लॉट देने और जिन परिवारों को अभी तक भूमि आवंटित नहीं हुई है, उन्हें भूमि उपलब्ध करवाने की मांग की। झील क्षेत्र में आवागमन बेहतर बनाने के लिए बैरी-दड़ोला से लूहणु पुल, ज्योरीपत्तन पुल, बवखाल पुल, बुखर-कोसरियां पुल, गाह-चलैला पुल और डेहण-नारल पुल का जल्द निर्माण करवाने की मांग उठाई गई। इसके अलावा झील क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने और स्थानीय विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की गई। वन भूमि पर बसे भाखड़ा विस्थापित परिवारों को आवास, कृषि भूमि और पशुशालाओं के लिए वन अधिकार अधिनियम-2006 के तहत अधिकार-पट्टे देने का आग्रह भी किया गया।
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