एम्स बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं से संवाद करते डॉ तरूण। स्रोत: एम्स प्रबंधन
छात्रों के शैक्षणिक, भावनात्मक और व्यक्तिगत विकास पर रहा फोकस
मानसिक स्वास्थ्य और जीवन संतुलन पर विशेषज्ञों ने किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में मेंटर-मेंटी एवं गार्जियनशिप पर एक इंटरैक्टिव कार्यशाला हुई। इसका उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक, भावनात्मक और व्यक्तिगत विकास के लिए मजबूत और संवेदनशील मेंटर-मेंटी संबंध स्थापित करना था। आयोजन कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) और डीन अकादमिक, डॉ. रुपाली पारलेवार के मार्गदर्शन में किया गया।
डॉ. मीनल एम ठाकरे, आयोजक सचिव एवं समन्वयक, माइंड्स सेल ने इसे सहानुभूतिपूर्ण और निष्पक्ष मेंटरशिप बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण सत्र के रूप में प्रस्तुत किया। कार्यशाला में पैनल चर्चा हुई, जिसमें मेंटी की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं पर विशेषज्ञों ने सुझाव और समाधान साझा किए। मुख्य वक्ताओं में प्रो. (डॉ.) पी. श्रीराम ने भावनात्मक संवाद और सहानुभूतिपूर्ण सुनने की कला पर, प्रो. (डॉ.) अनुपम प्रशर ने सहानुभूति और रचनात्मक प्रतिक्रिया के संतुलन पर और डॉ. ज्योति गुप्ता ने करियर मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन संतुलन पर अपने विचार साझा किए। सत्र का समन्वय क्लीनिक मनोवैज्ञानिक सुश्री शिवरंजिनी और सुश्री अर्चना कश्यप ने किया। फैकल्टी मेंटर्स और छात्रों की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम और प्रभावी बना। कार्यशाला का समापन एक इंटरैक्टिव ओपन फोरम के साथ हुआ, जिसमें सभी ने एम्स बिलासपुर में सहयोगी, सुलभ और समावेशी मेंटरशिप वातावरण विकसित करने का संकल्प लिया।