एम्स बिलासपुर में आइडिया टू इंपैक्ट कार्यशाला आयोजित
विशेषज्ञों ने समस्या पहचान से लेकर परीक्षण तक की प्रक्रिया समझाई
छात्रों के नवाचार प्रस्तावों को मिला मार्गदर्शन
स्कूली छात्र दर्श वर्मा को भी किया गया सम्मानित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में आइडिया टू इंपैक्ट विषय पर संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। नवाचार, इनक्यूबेशन एवं उद्यमिता प्रकोष्ठ और अनुसंधान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुई कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र के विचारों को व्यवहारिक एवं मरीजों के उपयोग योग्य समाधान में बदलने के लिए छात्रों और प्राध्यापकों को प्रेरित करना रहा।
शुभारंभ कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने कहा कि किसी भी सफल नवाचार की पहली सीढ़ी ऐसी समस्या की पहचान करना है, जिसका समाधान संभव हो। उन्होंने प्रतिभागियों को वास्तविक नवाचार विचार की समझ विकसित करने पर बल दिया। अनुसंधान अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) अनुपम पराशर ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए एक विचार को अंतिम उत्पाद तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई। इस अवसर पर परीक्षा अधिष्ठाता डॉ. निधि पुरी और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) दिनेश वर्मा भी उपस्थित रहे। सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय, पुणे से आए सर्जन कमांडर डॉ. घोष ने कहा कि स्पष्ट समस्या विवरण तैयार करना, उसके समाधान का प्रारूप विकसित करना और उपयोग से पहले उसका कठोर परीक्षण करना अत्यंत आवश्यक है। वहीं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के डॉ. दीपांकर देव ने बौद्धिक संपदा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विचार स्पष्ट होते ही पेटेंट के लिए आवेदन कर देना चाहिए।
एमबीबीएस के छात्रों आर्यन, देव्यांश, दीपांशी, कुमकुम, संयम और भूपेन ने रोगी देखभाल एवं चिकित्सा शिक्षा से जुड़े अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने उन्हें नवीनता और दीर्घकालिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। डीएवी पब्लिक स्कूल बिलासपुर के छात्र दर्श वर्मा को रोगी देखभाल में नवाचार योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
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आगे भी होंगे नवाचार से जुड़े कार्यक्रम
नवाचार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश वर्मा ने बताया कि आने वाले समय में बौद्धिक संपदा, प्रारूप निर्माण और नवाचार मार्गदर्शन से जुड़े और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित कर कार्यक्रम का समापन किया गया।