संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मानव जीवन कई योनियों के बाद मिलता है। प्रभु कृपा से मिले इस जीवन को सही ढंग से जीना चाहिए। इंसान दुनिया में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है। उसे उसके कर्मों के अनुसार याद किया जाता है।
मनुष्य को चाहिए कि छल-कपट और सांसारिक मोह माया में फंसने के बजाय वह हरि चरणों में ध्यान लगाते हुए परोपकार करे। यह उद्गार कथा व्यास आचार्य जीवानंद शैल ने दनोह-कुनाला स्थित गोपाल मंदिर में आयोजित किए जा रहे श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह में प्रवचन करते हुए शनिवार को प्रकट किए। श्रीकृष्ण-सुदामा की दोस्ती का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य शैल ने कहा कि इन दोनों की मित्रता की आज भी मिसाल दी जाती है। गरीबी और अभाव का जीवन जी रहे सुदामा की याचना के बगैर ही श्रीकृष्ण ने उनका उद्धार करते हुए मित्रता का धर्म निभाया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा पुराण में सभी ग्रंथों का सार है। इस ग्रंथ में भगवान की सभी लीलाओं का वर्णन किया गया है। हालांकि भागवत कथा के श्रवण का सौभाग्य जीवन में कई बार मिलता रहता है, लेकिन इसमें दिए गए उपदेशों पर अमल करने से ही पुण्य प्राप्त होता है। गोपाल मंदिर विकास समिति के महासचिव राजपाल कपिल ने बताया कि भागवत कथा सप्ताह रविवार को संपन्न होगा। अंतिम दिन जनसहयोग से भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।