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भौगोलिक बनावट, सीमित कृषि भूमि, कम उत्पादन, किसान क्रेडिट कार्ड की है सीमित पहुंच
योजना में शामिल होने से माइक्रो लेवल प्लानिंग से ही होगी किसानों की वास्तविक प्रगति
कृषि उत्पादकता, किसानों की आय, ग्रामीण समृद्धि बढ़ाने को केंद्र ने की बड़ी पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर से देशभर के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ किया। देश के 100 आकांक्षी जिलों में हिमाचल से केवल बिलासपुर इस योजना में चयनित हुआ है। इस योजना से किसानों बागवानों को अत्याधुनिक बनाकर उनकी आर्थिकी सुदृढ़ की जाएगी। जिले भर के करीब 65 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
बिलासपुर का चयन उसकी भौगोलिक बनावट, सीमित कृषि योग्य भूमि, कम उत्पादकता और किसान क्रेडिट कार्ड की सीमित पहुंच को देखते हुए किया गया है। देश के जिन जिलों में फसल की औसत उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से कम, फसल चक्र 1.55 से कम और संस्थागत ऋण सुविधा सीमित है, उन्हें इस योजना में शामिल किया गया है। जिले की जलवायु और मिट्टी की संरचना को देखते हुए यहां स्थानीय जरूरतों के अनुसार फसलों और कृषि प्रणालियों की माइक्रो लेवल प्लानिंग से ही वास्तविक प्रगति संभव है। यही कारण है कि केंद्र ने बिलासपुर को इस योजना में शामिल कर हिमाचल का प्रतिनिधि जिला बनाया है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत 11 विभागों की 36 कृषि-संबंधी योजनाओं को एकीकृत किया गया है, जिससे किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ संगठित और प्रभावी रूप से पहुंच सके।
जिला कृषि अधिकारी नरेश कुमार ने कहा कि प्रदेश में बिलासपुर और हमीरपुर दो जिले हैं जिनकी परिस्थिति कृषि के क्षेत्र में एक जैसी है। पहले चरण में छह साल के लिए बिलासपुर को इसमें शामिल किया गया है। अगर योजना सफल रही तो अगले चरण में हमीरपुर को इससे जोड़ा जाएगा। इसमें कृषि के साथ कुल 18 विभाग होंगे। एसओपी जारी होने के बाद विभागों की सूची मिलेगी।
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योजना समिति के अध्यक्ष होंगे उपायुक्त
जिले में इस योजना के शुभारंभ को लेकर बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक चयनित जिले में जिला धन-धान्य कृषि योजना समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त करेंगे। यह समिति जिले के लिए व्यावहारिक और सशक्त कृषि विकास योजना तैयार करेगी,उ से लागू करने की निगरानी करेगी। निर्देश दिए कि बिलासपुर के लिए बनाई जाने वाली योजना में कटाई के बाद भंडारण, मूल्य संवर्धन, कृषि आधारित उद्योग, महिलाओं और युवाओं की सहभागिता जैसे पहलुओं को विशेष रूप से शामिल किया जाए।
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जिले में 32 हजार हेक्टेयर भूमि पर ही की जाती है खेती
जिले में अब तक 32 हजार हेक्टेयर ही कृषि योग्य भूमि है। इस जमीन पर 65 हजार किसान परिवार खेती करता है। वहीं इन परिवारों की आर्थिकी इसी पर निर्भर है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि इसमें से भी 70 फीसदी किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर रहता है। अगर बारिश समय पर हुई तो फसल अच्छी होती है,नहीं तो उत्पादन न के बराबर होता है।
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बागवानी को भी मिलेगा लाभ
जिले में 9500 हेक्टेयर पर बागवानी की जाती है। 15 से 20 हजार बागवान हैं, लेकिन छह हजार के ही उद्यान कार्ड बने हैं। दो हजार बागवान एचपी शिवा से जुड़े हैं। इस योजना से जुड़ने से अब इन बागवानों को भी लाभ मिलेगा।
डॉक्टर देवेंद्र ठाकुर, एचपी शिवा परियोजना निदेशक