परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार को ऑनररी कैप्टन बनने पर तमगा लगाते सेना के अधिकारी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कारगिल युद्ध के महानायक और परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार अब ऑनररी (मानद) कैप्टन बन गए हैं। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विजय चौक के ऐतिहासिक प्रांगण में उन्हें इस गौरवशाली पद से नवाजा गया। 1999 के कारगिल युद्ध में 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के राइफलमैन के रूप में दुश्मन के दांत खट्टे करने वाले संजय कुमार ने वीरता की जो इबारत लिखी थी, उसे सेना ने सर्वोच्च सम्मान दिया है। बिलासपुर के झंडूता स्थित बकैन गांव के इस सपूत ने गोलियों से छलनी होने के बाद भी दुश्मन के बंकरों को नेस्तनाबूद कर दिया था। बताते चलें कि संजय कुमार 28 फरवरी को सेवानिवृत होंगे। 29 साल आठ माह की सेवाएं सेना में देने के बाद अब वो अपने जिले में आकर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जंग शुरू करेंगे। उनका मानना है कि फौजी कभी रिटायर नहीं होता, बस उसकी ड्यूटी बदल जाती है।
बिलासपुर के बलिदानी बलदेव चंद को मरणोपरांत शौर्य चक्र
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए बिलासपुर के सनीहरा पंचायत के गांव थेह निवासी लांस दफेदार बलदेव चंद को उनकी वीरता और साहस के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इसके लिए मंजूरी दे दी है। बता दें कि लांस दफेदार बलदेव चंद उधमपुर के सियोज धार खड्ड नाला क्षेत्र में आतंकियों से हुई मुठभेड़ के दौरान बलिदान हो गए थे। ऑपरेशन के दौरान उन्होंने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया और अपने साथियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। उनकी इसी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित वीरता सम्मानों में शामिल शौर्य चक्र दिया जाएगा। 19 सितंबर 2025 को वह वीरगति को प्राप्त हुए थे। बलदेव चंद का जन्म एक सैन्य परंपरा वाले परिवार में हुआ था। उनके पिता विशनदास भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि चाचा और ताया भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। इसी देशभक्ति की विरासत से प्रेरित होकर बलदेव ने वर्ष 2011 में भारतीय सेना ज्वाइन की थी। मरणोपरांत शौर्य चक्र मिलने की घोषणा के बाद पूरे जिले में बलिदानी बलदेव चंद को नमन किया जा रहा है।