मरीजों के लिए इसका सीधा उपयोग
जब किसी मरीज को सेप्सिस (खून का संक्रमण), यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन), दिमागी बुखार या गंभीर निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियां होती हैं, तो हर एक मिनट कीमती होता है। इस मशीन के उपयोग से मरीज को ट्रायल एंड एरर (अंदाजे से दवा देने) के दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। मरीज के शरीर में जो बैक्टीरिया होगा, उसे खत्म करने की सटीक दवा पहले ही दिन से शुरू हो जाएगी। इससे मरीज के शरीर पर दवाओं के साइड इफेक्ट्स बेहद कम होंगे और वह बहुत जल्दी स्वस्थ होकर अपने घर लौट सकेगा।
हिमाचल के मरीजों को कैसे मिलेगा इसका विशेष लाभ
भौगोलिक रूप से कठिन परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश के मरीजों के लिए यह मशीन वरदान साबित हो सकती है। अब तक इस तरह के एडवांस और ऑटोमेटेड टेस्ट के लिए प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को या तो चंडीगढ़ पीजीआई या दिल्ली का रुख करना पड़ता था, या फिर बेहद महंगे प्राइवेट अस्पताल में हजारों रुपये फूंकने पड़ते थे। पहाड़ी क्षेत्रों में समय पर रिपोर्ट न मिलने के कारण कई बार संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता था। अब बिलासपुर एम्स में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को राहत मिलेगी।