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Bilaspur News: 24 घंटे में खुला घुमारवीं का शराब ठेका, आबकारी विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल

Fri, 12 Jun 2026 11:56 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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घुमारवीं में सीज करने के बाद फिर खोला गया ठेका। संवाद
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सील लगाने के अगले ही दिन हटाई पाबंदी, बाजार में चर्चाओं का दौर तेज
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं बाजार स्थित एक शराब के ठेके को सील करने के महज 24 घंटे के भीतर ही आबकारी एवं कराधान विभाग को अपनी कार्रवाई वापस लेनी पड़ी। वीरवार देर रात विभाग ने स्वयं ही ठेके पर लगाई गई सील को खोल दिया, जिसके बाद विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटनाक्रम ने स्थानीय बाजार में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है और लोग विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार देर शाम विभाग ने किसी कारणवश ठेके पर कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया था। हालांकि, अगले ही दिन देर रात उसी ठेके को दोबारा खोलने की अनुमति दे दी गई। विभाग के इस अचानक यू-टर्न ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि ठेका नियमों के विरुद्ध संचालित हो रहा था, तो इतनी जल्दी सील क्यों हटाई गई? और यदि सब कुछ नियमों के अनुसार था, तो फिर सील लगाने जैसी कठोर कार्रवाई किस आधार पर की गई? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ठेकेदार ने पहले ही विभागीय कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए विरोध जताया था। ठेकेदार का कहना है कि ठेका विभाग द्वारा निर्धारित सभी नियमों और शर्तों के अनुरूप संचालित किया जा रहा था। भवन का नक्शा भी विभागीय स्वीकृति के बाद ही तैयार किया गया था और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही संचालन शुरू किया गया था। इसके बावजूद, ठेकेदार की गैरमौजूदगी में कार्रवाई कर ठेके को सील कर दिया गया।

विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह
इस मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि जिस ठेके को करीब तीन महीने पहले विभाग ने सभी पहलुओं की जांच के बाद संचालन की अनुमति दी थी, उसमें अचानक ऐसी कौन सी कमी सामने आ गई कि सील लगाने जैसी कार्रवाई करनी पड़ी। वहीं, यदि कोई अनियमितता थी, तो विभाग को इसका पता तीन महीने तक क्यों नहीं चला? इस मामले में पारदर्शिता और स्पष्टता की अपेक्षा की जाती है, ताकि आम जनता के बीच विभाग के प्रति विश्वास बना रहे।
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अधिकारियों का पक्ष अस्पष्ट
इस पूरे घटनाक्रम में, मामले में विभागीय अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन उठाना उचित नहीं समझा। अधिकारियों की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया न आने के कारण, पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थिति और अधिक रहस्यमय बन गई है। विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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