ग्राउंड रिपोर्ट
-घुमारवीं में डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश का असर
आईजीएमसी में चिकित्सक की बर्खास्तगी के विरोध में अवकाश
ओपीडी ठप, सामान्य दिनों में रोजाना आते हैं 300 से अधिक मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेशभर में डॉक्टरों के एक दिवसीय सामूहिक अवकाश का व्यापक असर सिविल अस्पताल घुमारवीं में देखने को मिला। शिमला स्थित आईजीएमसी अस्पताल में एक चिकित्सक की बर्खास्तगी के विरोध में रखे गए इस अवकाश के चलते अस्पताल की ओपीडी सहित सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप रहीं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
सामान्य दिनों में सिविल अस्पताल घुमारवीं की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सामूहिक अवकाश के कारण मंगलवार को ओपीडी में गिने-चुने मरीज ही नजर आए। जो मरीज अस्पताल पहुंचे, वे डॉक्टरों के कक्षों के बाहर बंद दरवाजे देखकर असमंजस में पड़ गए। जानकारी मिलने पर कि आज सभी चिकित्सक अवकाश पर हैं, कई मरीज मायूस होकर बिना इलाज कराए लौट गए। हालांकि एसोसिएशन की ओर से आपातकालीन सेवाएं सुचारू रखने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई। सुबह करीब 11 बजे आपातकालीन कक्ष के बाहर कई मरीज उपचार की प्रतीक्षा करते दिखे। पूछताछ करने पर पता चला कि आपातकालीन कक्ष में तैनात चिकित्सक पोस्टमार्टम के लिए गए हुए थे, जिसके चलते मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। आपातकालीन कक्ष के बाहर बैठे मरीजों के साथ व्हीलचेयर पर मौजूद बुजुर्ग और असहाय मरीज भी इलाज की आस में इंतजार करते रहे। मरीजों के चेहरों पर चिंता और नाराजगी साफ झलक रही थी। कुछ मरीजों ने बताया कि वे दूरदराज के गांवों से आए हैं और बिना इलाज लौटना उनके लिए बेहद मुश्किल है, लेकिन मजबूरी में उन्हें वापस जाना पड़ रहा है।
ओपीडी में सभी चिकित्सकों के कक्ष पूरे दिन बंद रहे। इंतजार के बाद मरीज निराश होकर लौट गए। वहीं कुछ मरीजों ने मजबूरन निजी क्लीनिकों और निजी अस्पतालों का रुख किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ा। कुल मिलाकर, डॉक्टरों के एक दिवसीय सामूहिक अवकाश ने सिविल अस्पताल घुमारवीं की स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। पूरे दिन अस्पताल में अव्यवस्था और परेशान मरीजों की स्थिति सामने आती रही। मरीजों और उनके परिजनों में इस बात को लेकर नाराजगी देखी गई कि विरोध के चलते आम लोगों को इलाज से वंचित होना पड़ा। यह अवकाश एक बार फिर यह दर्शाता है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के सामूहिक अवकाश या विरोध का सीधा असर आम जनता पर कितना गंभीर पड़ता है।
घुमारवीं अस्पताल में ओपीडी बंद।