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Bilaspur News: फोरलेन से बदली घुमारवीं की तस्वीर, कारोबार के नए हब के रूप में उभरा शहर

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घुमारवीं शहर। संवाद
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भगेड़ से देलग तक फैला बाजार, जमीन की बढ़ती कीमतों और दुकानों के किराये में उछाल से निवेश की संभावनाएं बढ़ीं
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बड़े शोरूम और शिक्षण संस्थानों से बढ़ा व्यावसायिक विस्तार,1500 दुकानों वाले बाजार में नामी ब्रांड के शोरूम
पार्किंग की कमी, जाम और पुरानी सीवरेज व्यवस्था बनी चुनौती

संजीव शामा
घुमारवीं (बिलासपुर)। फोरलेन बनने से घुमारवीं में कारोबार की तस्वीर तेजी से बदली है। कभी आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतें पूरी करने वाला बाजार अब बड़े व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। भगेड़ से घुमारवीं होते हुए देलग तक कारोबार का दायरा बढ़ा है। करीब 1,500 दुकानों वाले बाजार में बड़े शोरूम, मॉल, होटल और नामी कंपनियों के ब्रांड के प्रतिष्ठान खुल चुके हैं। जमीन के दाम 20 से 40 लाख रुपये बिस्वा तक पहुंच गए हैं। कारोबार और निवेश की संभावनाएं बढ़ने के साथ शहर में पार्किंग, जाम और सीवरेज जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
पिछले करीब चार वर्षों में शहर के व्यावसायिक विस्तार में तेजी आई है। फोरलेन से हमीरपुर, सुजानपुर, कांगड़ा और धर्मशाला की ओर जाने वाले लोगों की आवाजाही बढ़ने से कारोबार को नए अवसर मिले हैं। पहले नगर परिषद के लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में सिमटा शहर अब भगेड़ से देलग तक फैलता दिखाई दे रहा है। व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से जमीन की मांग और दुकानों के किराये में भी उछाल आया है। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, दो वर्ष पहले 10 से 15 हजार रुपये मासिक किराये पर मिलने वाली दुकानों का किराया प्रमुख स्थानों पर अब लाखों रुपये तक पहुंच गया है।
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पहले जिन ब्रांड के शोरूम में खरीदारी करने के लिए लोगों को चंडीगढ़ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था, वे अब घुमारवीं में भी उपलब्ध हैं। बड़े शोरूम और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खुलने से ग्राहकों को खरीदारी के अधिक विकल्प मिले हैं। शहर में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियां निवेशकों को भी आकर्षित कर रही हैं। जमीन की कीमतों में आया उछाल बाजार के विस्तार को दर्शाता है। घुमारवीं की पहचान केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। शहर शिक्षा के केंद्र के रूप में भी विकसित हुआ है। यहां के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने के लिए हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ दूसरे राज्यों से भी विद्यार्थी पहुंचते हैं। इससे किराये के कमरों, खानपान, परिवहन और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ी है। शिक्षा और कारोबार के विस्तार का असर आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। संवाद
पार्किंग और जाम से लोग परेशान
बाजार में बड़े शोरूम और मॉल खुलने के बावजूद पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ग्राहकों को वाहन खड़े करने के लिए जगह तलाशनी पड़ती है। सड़क किनारे वाहन खड़े होने से कई बार यातायात प्रभावित होता है। सप्ताहांत पर फोरलेन से गुजरने वाले वाहनों और खरीदारी के लिए बाजार पहुंचने वाले लोगों की संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति बन जाती है। बाजार का दायरा बढ़ने के साथ वाहनों की संख्या और पार्किंग की जरूरत भी बढ़ी है, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है।
पुरानी सीवरेज व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
शहर में सीवरेज व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बन रही है। करीब 30 वर्ष पहले लगभग पांच हजार की आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई व्यवस्था अब 20 से 25 हजार तक पहुंच चुकी आबादी और बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के सामने अपर्याप्त साबित हो रही है। शहर का विस्तार होने के साथ सीवरेज नेटवर्क, पार्किंग और यातायात प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना जरूरी हो गया है।
कारोबारियों ने बताईं बाजार की बदलती तस्वीर
कपड़ा व्यापारी कुंदन रत्न के अनुसार, घुमारवीं में कारोबार का दायरा बढ़ने से बाजार का स्वरूप बदला है। बड़े शोरूम और नए प्रतिष्ठान खुलने से ग्राहकों को खरीदारी के अधिक विकल्प मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की सुविधा के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था भी जरूरी है।
व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला
ढाबा व्यवसायी प्रमोद संख्यान ने बताया कि फोरलेन से लोगों की आवाजाही बढ़ने के कारण व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। शहर में कारोबार की संभावनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि विकास के साथ यातायात प्रबंधन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना भी जरूरी है।
मिठाई कारोबार में भी बाजार के विस्तार का असर
मिठाई विक्रेता सतीश के अनुसार, बाजार का दायरा बढ़ने से खरीदारी और खानपान से जुड़ी जरूरतों के लिए लोगों को अधिक विकल्प मिल रहे हैं। उन्होंने पार्किंग और यातायात व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया।
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जमीन की कीमतों में उछाल
प्रॉपर्टी डीलर दिनेश कुमार लक्की ने बताया कि घुमारवीं में जमीन के दाम 20 से 40 लाख रुपये बिस्वा तक पहुंच गए हैं। भगेड़ से देलग तक व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार से जमीन की मांग बढ़ी है। नए प्रतिष्ठानों के खुलने से व्यावसायिक जमीन की अहमियत भी बढ़ी है।
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