जलाशय में स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने पर विभाग का जोर
जून-जुलाई में विभागीय मत्स्य फार्मों में तैयार किया था 7,04,645 कार्प मत्स्य बीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मत्स्य विभाग ने जून और जुलाई में गोबिंदसागर जलाशय में 7.04 लाख से अधिक गुणवत्तायुक्त कार्प मत्स्य बीज का संचयन किया है। इसका उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय मत्स्य प्रजातियों का संरक्षण करना है। विभागीय मत्स्य बीज फार्मों में तैयार 100 मिलीमीटर से अधिक आकार के कुल 7,04,645 मत्स्य बीज जलाशय में छोड़े गए।
विभाग का मानना है कि बड़े आकार के मत्स्य बीज के जीवित रहने की संभावना अधिक होती है। इससे जलाशय में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ जैव विविधता के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। संचयन अभियान 18 जून को शुरू हुआ। नालागढ़ फार्म से 1.50 लाख हंगेरियन स्ट्रेन और 1,46,288 कॉमन कार्प मत्स्य बीज ऊना के दोबड़घाट स्थित गोबिंदसागर जलाशय में छोड़े गए। 4 जुलाई को दयोली (घागस) फार्म से 2,02,860 कॉमन कार्प मत्स्य बीज मंडी भराड़ी क्षेत्र में संचयित किए गए। 7 जुलाई को मंडी के अलसू मत्स्य बीज फार्म से 2,05,497 अमूर कार्प मत्स्य बीज गोबिंदसागर के नकराणा क्षेत्र में छोड़े गए। इन सभी कार्यक्रमों में सहायक निदेशक मत्स्य बिलासपुर पंकज ठाकुर पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे। मत्स्य विभाग के निदेशक एवं प्रभारी विवेक चंदेल ने बताया कि विभाग स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज का नियमित संचयन कर रहा है। 100 मिलीमीटर से अधिक आकार के मत्स्य बीज के जीवित रहने की संभावना अधिक होती है। इससे मत्स्य उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जलाशयों की मत्स्य संपदा का संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित होता है। मत्स्य सहकारी सभाओं ने भी स्थानीय प्रजातियों के मत्स्य बीज के संचयन पर बल दिया है। इसका उद्देश्य झील की जैव विविधता और प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों का संरक्षण करना है।
किसानों के लिए एक रुपये प्रति बीज उपलब्ध
सहायक निदेशक मत्स्य बिलासपुर पंकज ठाकुर ने जिले के मत्स्य किसानों से दयोली (घागस) स्थित विभागीय मत्स्य बीज फार्म से गुणवत्तायुक्त कार्प मत्स्य बीज प्राप्त करने का आह्वान किया। फार्म में पर्याप्त मात्रा में मत्स्य बीज उपलब्ध है। इच्छुक किसान मात्र एक रुपये प्रति बीज की दर से इसे प्राप्त कर सकते हैं। मानसून के दौरान तालाबों में पर्याप्त पानी होने के कारण यह मत्स्य बीज संचयन का सबसे उपयुक्त समय है। दयोली (घागस) फार्म में भारतीय मेजर कार्प प्रजातियों के प्रजनन का कार्य भी शुरू हो चुका है। इनका मत्स्य बीज भी जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि प्रदेश के जलाशयों में स्थानीय एवं गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज का नियमित संचयन हो। इससे मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, जैव विविधता सुरक्षित रहेगी और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी।