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Bilaspur News: कृषि समझौते और चार लेबर कोड के विरोध में किसानों-मजदूरों का प्रदर्शन

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उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते एटक के सदस्य। संवाद
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एटक के बैनर तले उपायुक्त कार्यालय के बाहर दिया धरना, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
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कहा- मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन किया जाएगा तेज

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अमेरिका के साथ किए गए कृषि समझौते और चार लेबर कोड के विरोध में सोमवार को ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन सेंटर (एटक) के बैनर तले किसानों और मजदूरों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। वक्ताओं ने कृषि समझौते को रद्द करने और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की मांग उठाई।
सीपीआई नेता प्रवेश चंदेल ने कहा कि केंद्रीय किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर देशभर में किसान संगठन और केंद्रीय ट्रेड यूनियनें इस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ किए गए कृषि समझौते से भारतीय कृषि और किसानों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। सरकार ने किसानों से एमएसपी लागू करने का वादा किया था, लेकिन इसे लागू करने के बजाय विदेशी किसानों और विशेष रूप से अमेरिकी किसानों के लिए भारतीय बाजार खोलने का काम किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि किसान सभा की ओर से मांग की जा रही है कि इस समझौते को तत्काल रद्द किया जाए। अगर केंद्र सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटती है तो आने वाले समय में देशभर में किसानों को लामबंद कर आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों ने पहले भी 13 महीने तक संघर्ष कर तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाया था और इसी तरह इस समझौते को भी रद्द करवाने के लिए आंदोलन किया जाएगा।
चंदेल ने चार लेबर कोड को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मजदूरों ने लंबे संघर्ष के बाद ट्रेड यूनियन एक्ट, न्यूनतम वेतन अधिनियम और औद्योगिक विवाद अधिनियम सहित कई श्रम कानून हासिल किए थे। आरोप लगाया कि इन कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड बनाए गए हैं, जो मजदूरों के हित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि काम के घंटे 12 किए जाने की बात भी मजदूरों के खिलाफ है।
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उन्होंने स्कीम वर्कर्स की समस्याओं को भी उठाया। कहा कि आंगनबाड़ी, मिड-डे मील समेत विभिन्न योजनाओं में काम करने वाली महिलाएं 20-20 वर्षों से सेवाएं दे रही हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा है। कई स्कीम वर्कर्स को चार हजार से 4500 रुपये तक मानदेय मिलता है और इसमें भी केंद्र व राज्य सरकारों की हिस्सेदारी होती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद कई कर्मियों को 4500 रुपये तक का मानदेय भी नहीं मिल पा रहा है। इस मौके पर लेखराम वर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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