बरठीं सीएचसी में नवजात शिशु देखभाल सप्ताह का आयोजन
कम वजन होता है नवजात शिशु मृत्यु का प्रमुख कारण
हर साल लगभग 35 लाख बच्चे समय से पहले होते हैं पैदा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत बरठीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नवजात शिशु देखभाल सप्ताह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. परविंद्र सिंह के आदेशानुसार, डॉ. अरविंद टंडन की अध्यक्षता में हुआ। इसमें खंड स्वास्थ्य शिक्षक दीप कुमार, कमल कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर महिलाओं को नवजात शिशु की देखभाल, स्तनपान के महत्व, स्वच्छता और नवजात शिशु मृत्यु दर को रोकने के उपायों पर जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि नवजात शिशु देखभाल सप्ताह की शुरुआत 2014 में शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से की गई थी। इस सप्ताह का उद्देश्य नवजात शिशु को जीवन के पहले कुछ सप्ताह में सुरक्षित और स्वस्थ रखना है। देश में आज भी 46 फीसदी माताओं की प्रसव के 24 घंटे के भीतर और 40 फीसदी नवजात शिशुओं की मृत्यु 24 घंटे के अंदर होती है। नवजात शिशु मृत्यु का प्रमुख कारण कम वजन का जन्म है, जो कि 48 फीसदी मामलों में देखा जाता है, जबकि प्रसव के दौरान दम घुटने से 13 फीसदी निमोनिया से 12 फीसदी और अन्य विकृतियों से 7 फीसदी बच्चों की मृत्यु होती है। हर साल लगभग 35 लाख बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं, जिनमें से करीब 10 लाख बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, जिन्हें अस्पतालों में एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) की जरुरत पड़ती है।
शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसे मां से लगाना, शिशु के तापमान और हृदय गति को नियंत्रित करता है। पहले घंटे के भीतर स्तनपान करवाना शिशु के लिए पोषक तत्व और एंटीबॉडी प्रदान करता है। नवजात शिशु की गर्भनाल को साफ और सूखा रखें। संक्रमण से बचने के लिए बच्चों को छूने से पहले हाथ धोएं। ठंड से बचाने के लिए शिशु को गर्म कपड़ों में लपेटना जरूरी है।
कार्यक्रम में महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक लता चंदेल, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता सरिता देवी, आशा सामाजिक कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में शामिल रहीं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने नवजात शिशु देखभाल से संबंधित सवाल पूछे, स्वास्थ्य शिक्षकों ने उनकी शंकाओं का समाधान किया।
इनसेट
प्रतियोगिताओं में ये रहे अव्वल
स्लोगन प्रतियोगिता में मोनिका प्रथम, सपना कुमारी दूसरे, रचना तीसरे स्थान पर रहीं। विजेताओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।