फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: मनरेगा लोकपाल के फैसले के बाद भी छह माह से नहीं भरी रिकवरी

विज्ञापन
विज्ञापन
खंड विकास अधिकारी ने पैसे की रिकवरी के लिए तहसीलदार को भेजा मामला
विज्ञापन

आपदा राहत लेने के लिए भूस्खलन की झूठी रिपोर्ट, जियो टैगिंग में नहीं हुई थी पुष्टि

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मनरेगा योजना में झूठी रिपोर्ट के आधार पर राहत राशि लेने वाले लाभार्थी के खिलाफ अब प्रशासन सख्त हो गया है। खंड विकास अधिकारी घुमारवीं ने तहसीलदार (रिकवरी) बिलासपुर को एक पत्र भेजते हुए बकरोआ गांव के एक लाभार्थी के खिलाफ 4507 रुपये की रिकवरी प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है।
यह मामला राज्य अपीलीय प्राधिकारी (मनरेगा) शिमला द्वारा 29 जनवरी 2025 को दिए गए आदेश के बाद उठाया गया है। पत्र के अनुसार, लाभार्थी को इस संबंध में समय पर सूचित किया गया, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी उसने निर्धारित राशि जमा नहीं की।
विज्ञापन
विज्ञापन

बताते चलें कि साल 2023 में आई आपदा के दौरान लाभार्थी ने यह कहकर राहत राशि की मांग की थी कि उसके मकान के पीछे भारी भूस्खलन हुआ है। मौके पर गए पटवारी ने बिना खसरा नंबर दर्ज किए रिपोर्ट दे दी, लेकिन जियो टैगिंग से स्पष्ट हुआ कि उक्त स्थल पर ऐसा कोई भूस्खलन नहीं हुआ था। जबकि आसपास के क्षेत्रों में घटनाएं साफ दर्ज हैं। इस मामले की शिकायत हुई और मनरेगा लोकपाल ने जांच के बाद लाभार्थी से 3120 रुपये की वसूली के निर्देश दिए। साथ ही शिकायतकर्ता पर पंचायत पदाधिकारियों पर आरोप लगाने के लिए 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। शिकायतकर्ता ने यह फैसला प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी, जहां नौ लोग दोषी पाए गए। इनमें से सात ने 1387-1387 रुपये भर दिए। हालांकि, पटवारी हल्का बकरोआ ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इसी बहाने लाभार्थी ने भी अब तक रिकवरी नहीं भरी। खंड विकास अधिकारी ने मामले में साक्ष्यों सहित संपूर्ण रिकॉर्ड तहसीलदार रिकवरी को भेजते हुए कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें