- बोले, 12 माह में लिया 12 हजार करोड़ कर्ज, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था
-विपक्षी विधायकों के क्षेत्रों में हो रहा भेदभाव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का नतीजा है कि विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को अभी तक वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों को इसके लिए लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। 12 माह में 12 हजार करोड़ कर्ज लेने के बावजूद इन कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला। यह बात प्रदेश भाजपा प्रवक्ता और विधायक श्री नयना देवी जी रणधीर शर्मा ने कही।
बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि बोर्ड के कर्मचारियों को आज वेतन की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रदेश सरकार व्यवस्था बनाने में नाकाम हुई है। सत्ता में आते ही कांग्रेस ने फिजूलखर्ची करना शुरू कर दिया। संविधान में प्रावधान न होते हुए भी छह सीपीएस की नियुक्तियां हुईं। मंत्रियों की कोठियों पर करोड़ों रुपये खर्च किया गया। विभिन्न निगमों और बोर्ड में चहेतों को नियुक्तियां दी जा रही हैं। वहीं पूर्व सरकार ने लोगों के लिए जो कल्याणकारी योजनाएं शुरू की थी, वह भी इस सरकार ने बंद कर दी। नए संस्थान शुरू करना तो दूर, पुराने संस्थानों को सरकार ने बंद कर दिया। यह सरकार इंतजार की सरकार बनकर रह गई है। प्रदेश में हर वर्ग को प्रत्येक सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। लोग आज भी चुनावों में कांग्रेस की ओर से दी गई गारंटियों को पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं। यहां तक कि इनके विधायकों को मंत्री पद मिलने के लिए एक साल का इंतजार करना पड़ा। जब इंतजार करते हुए दो मंत्रियों की नियुक्ति हुई तो उनको विभाग मिलने का इंतजार करना पड़ रहा है। विधायक ने कहा कि आपदा राहत आवंटन में भेदभाव किया जा रहा है। केंद्र से सहयोग के बावजूद जिन लोगों को इसका लाभ मिलना था, उन्हें यह लाभ नहीं मिला। इसमें भाई-भतीजावाद हो रहा है। आपदा के समय प्रभावित लोगों के लिए जो अन्य घोषणा की गई थी, उनका लाभ भी उन्हें नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आपदा राहत राशि वितरण की जांच होनी चाहिए, ताकि पता चल सके की किसको इसका लाभ मिला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई है। इस मौके पर सोनल शर्मा मौजूद रहे।
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विपक्षी विधायकों के क्षेत्र में भेदभाव
रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार विपक्षी विधायकों के क्षेत्रों में भेदभाव कर रही है। श्री नयना देवी जी में राजकीय प्राथमिक पाठशाला बाग चम्यारा को पांच बच्चे होने के बावजूद इसको सरकार ने बंद कर दिया। घवांडल अस्पताल में छह डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, वहां पर आज एक डॉक्टर से काम चल रहा है। चंगर सिंचाई योजना में चार कनिष्ठ अभियंताओं के पद स्वीकृत हैं। चारों पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि फोरलेन से जुड़े ग्रामीणों को वर्तमान में बसों की उचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। अधिकतर रूट फोरलेन पर डायवर्ट हुए हैं, लेकिन किराया अभी भी पुराने रूट का लिया जा रहा है, जबकि दूरी कम हुई है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि इन समस्याओं पर ध्यान देकर इनका समाधान किया जाए।