यह तो तय है कि जिला परिषद में सरकार कांग्रेस समर्थित ही होगी। स्पष्ट बहुमत होने से इसमें कोई गुंजाइश शेष नहीं रह जाती। लेकिन, कौन जिला परिषद का अध्यक्ष और कौन उपाध्यक्ष बनेगा।
इसको लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। बिलासपुर में जिप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को लेकर लॉबिंग शुरू हो गई है। जिला के कद्दावर नेता इसको लेकर रणनीति बनाने में जुटे हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा लगाए गए ऑब्जर्वर मंगलवार को बिलासपुर पहुंच रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके लिए कांग्रेस समर्थित नव निर्वाचित जिप सदस्यों की बैठक बुलाई गई है।
इसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम पर मुहर लगेगी। हालांकि, किसके नाम पर मुहर लगेगी यह अभी फाइनल नहीं है।
गौरतलब है कि जिला परिषद बिलासपुर का अध्यक्ष पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित है।
ऐसे में जिला परिषद के 14 नव निर्वाचित सदस्यों में से जो एससी वर्ग से संबंधित है, पूरी सियासत उन्हीं पर केंद्रित हो गई है। हालांकि, कौन अध्यक्ष बनेगा यह अभी फाइनल नहीं हो पाया है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के दिग्गज नेता इसको लेकर मंथन में जुटे हुए हैं। इसको लेकर बैठकों का दौर भी चल रहा है।
गौरतलब है कि जिप चुनाव में कांग्रेस ने 9 सीटों पर कब्जा किया है। सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को आठ सदस्यों की आवश्यकता है। जबकि कांग्रेस दस सीटों का दावा कर रही है। निर्दलीय तौर पर जीते उम्मीदवारों में से एक कांग्रेसी पृष्ठभूमि के बताए जा रहे हैं। ऐसे में आंकड़ा दस के करीब पहुंच रहा है।
लिहाजा, यह तय है कि सरकार कांग्रेस समर्थित ही होगी। लेकिन, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर बाजी कौन मारता है इस पर संशय की स्थिति बरकरार है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी के दिग्गज नेताओं में अपनी पंसद और खासमखास को अध्यक्ष बनाने को लेकर हलचल चल रही है।
उधर, मंगलवार को पीसीसी द्वारा बिलासपुर के लिए लगाए गए ऑब्जर्वर कैबिनेट मंत्री सुधीर शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पठानिया और प्रदेश उपाध्यक्ष गीता नेगी बिलासपुर आ रहे हैं।
जिला परिषद के सभी नवनिर्वाचित कांग्रेस समर्थित पार्षदों की बैठक बुलाई गई है। इसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम पर मुहर लग सकती है। उधर, 13 जनवरी को जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए चुनाव की तिथि भी तय की गई है।