संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय चुनाव आयोग को न केवल पूर्ण निष्पक्षता से लोकसभा चुनाव संपन्न कराने के प्रयास करने चाहिए, बल्कि मतदाताओं को भी ऐसा लगना चाहिए कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव किए बिना एक समान व्यवहार कर रहा है।
रामलाल ठाकुर ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि लोग आज भी राष्ट्रीय चुनाव आयोग के पूर्व अध्यक्ष टीएन शेषन को इसलिए याद करते हैं क्यों कि सत्ता पक्ष के किसी भी नेता ने यदि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया तो उन्होंने सदैव उसे दंडित करने की हिम्मत की। इस कारण उन्होंने देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी नाम कमाया। कहा कि यही कारण था कि कितने ही विदेशी नेताओं और उनकी सरकारों ने अपने देश में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए अपने विशेषज्ञ भारत में चुनाव प्रणाली का अध्ययन करने के लिए भेजे या फिर भारत से चुनाव विशेषज्ञ बुला कर अपने देश में चुनाव करवाए, लेकिन अब कुछ वर्ष से हमारे चुनाव आयोग पर विभिन्न क्षेत्रों से प्रश्न उठाए जाने लगे हैं, जो भारतीय लोकतंत्र और इसके संविधान, निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के पक्ष में नहीं है। चुनाव आयोग को गंभीरता से विचार करके मतदाताओं में अपनी छवि साफ-सुथरी बनाए रखने के प्रयास करने चाहिए।
रामलाल ठाकुर ने कहा कि उन्हें समाचार पत्रों में पढ़कर बहुत हैरानी होती है कि अब पांच राज्यों में सम्पन्न हुए चुनावों में भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं ने ऐसी अप्रत्यक्ष कोई आलोचना व गाली नहीं छोड़ी जो सार्वजनिक रूप से कांग्रेस पार्टी व इसके नेताओं तथा विरोध पक्ष को न दी हो। किन्तु आश्चर्य है कि राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने इस पर चुप्पी साधे रखी और ऐसा लगा कि जैसे चुनाव आयोग ने चुनाव आचार संहिता का तोड़ना सत्ताधारी दल का अधिकार मान लिया हो, जबकि विरोध पक्ष के नेता ने जरा सा भी कुछ ऊंचा –नीचा बोल दिया तो उसे तुरंत नोटिस थमा कर कार्रवाई की धमकी दे दी।