ठाकुर द्वारा समतैहन मंदिर में चल रही श्री भक्तमाल कथा के दौरान श्रद्धालु। संवाद
आचार्य प्रमोद पुंज ने सुनाया राजा रूक्मणगढ़ का चरित्र
कहा- एकादशी व्रत से ही हो जाते हैं भगवान प्रसन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई(बिलासपुर)। ठाकुर द्वारा समतैहन मंदिर में चल रही श्री भक्तमाल कथा के तीसरे दिन आचार्य प्रमोद पुंज ने श्रद्धालुओं को एकादशी व्रत का महत्व बताते हुए परम भागवत में वर्णित राजा रूक्मणगढ़ का चरित्र सुनाया। उन्होंने बताया कि राजा ने एकादशी व्रत का दृढ़ निश्चय कर भगवान को प्रसन्न किया।
कथा प्रसंग के दौरान आचार्य ने बताया कि इंद्र देव राजा की भक्ति से विचलित होकर मोहिनी नामक अप्सरा को भेजते हैं, जो अपनी सुंदरता से राजा को मोहित कर लेती है। मोहिनी की शर्तों के बावजूद राजा ने एकादशी के दिन व्रत तोड़ने से इंकार कर दिया। जब मोहिनी ने वरदानस्वरूप राजा से उनके पुत्र का सिर मांग लिया, तब भी राजा ने धर्म का पालन किया। अंततः भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए और राजा की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें एवं उनके परिवार को वैकुंठ ले गए। आचार्य प्रमोद पुंज ने कथा के दौरान वाल्मीकि, कुंती, रानी मंदालशा और राजा हरिश्चंद्र जैसे भक्तों के प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कुंती ने 26 श्लोकों में भगवान श्रीकृष्ण से केवल दुख मांगे ताकि हर समय भगवान की स्मृति बनी रहे। आचार्य ने कहा कि एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी है और प्रत्येक सनातनी को इसका पालन अवश्य करना चाहिए। कथा के दौरान उपस्थित भक्त भावविभोर होकर भगवान के नाम का कीर्तन करते रहे।