श्रीमद्भागवत कथा में सुनाया श्री कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। झंडूता के प्राचीन शिव मंदिर मनण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिवस पर पंडित प्रवेश शर्मा ने यह बात कही। उन्होंने श्री कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग भी सुनाया।
कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्री कृष्ण गोकुल पहुंच गए। कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा। श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल भजन प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे। एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाई दी गई और मक्खन व मिठाई बांटी गई। कथा महोत्सव में भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। पंडित प्रवेश ने कहा कि बैकुंठ धाम जाने के लिए श्रीमद्भागवत कथा का रसपान हर व्यक्ति को करना चाहिए। कथा के आयोजक सतपाल शर्मा, छोटा राम व रमेश ने बताया कि 31 अक्तूबर को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।