संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने कहा कि सेवानिवृत्त हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ में संविधान की सुरक्षा, मानवीय अधिकारों व अन्याय पर प्रहार करने क्षमता असीम थी। उन्होंने एक ओर इस सिद्धांत को प्रतिपादित करके अमल सुनिश्चित बनाया कि न्याय के लिए जेल से बेल सर्वोत्तम सिद्धांत है और देश का कानून न तो अंधा है और न ही किसी दंड का प्रतीक है।
प्रेस को जारी बयान में रामलाल ठाकुर ने कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले अंतिम दिन भी डीवाई चंद्रचूड़ का 45 केसों पर विचार करना जहां उनकी कार्य पद्धति का प्रकटीकरण है वहीं अन्य न्यायाधीशों को यह संदेश भी देता है कि लाखों अटके पड़े केसों में कैसे न्याय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतिम दिन में उन्होंने अपने भाषण में उनकी माता द्वारा रखे उनके धनंजय नाम की व्याख्या की। जिस प्रकार भारत के ही नहीं बल्कि बाहरी देशों के लोग भी पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को लोग याद करते हैं उसी प्रकार डीवाई चंद्रचूड़ को भी लोग उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णयों के लिए सदैव याद करेंगे।