बिलासपुर में गोबिंद सागर झील के किनारे बनाए जा रहे रेल लाइन के वायाडक्ट । संवाद
- ढाई किलोमीटर लंबे वायाडक्ट के लिए बनाए जा रहे खंभों का निर्माण फिर हुआ शुरू
- जलस्तर बढ़ने के बाद नाले का नौण, लुहणू घाट, सांडू का मैदान में बंद था कार्य
- झील के ऊपर और आसपास बनाए जा रहे हैं 69 खंभे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील का जलस्तर कम होने से बिलासपुर शहर के पास भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन का निर्माण फिर से रफ्तार पकड़ेगा। शहर के पास करीब ढाई किलोमीटर के दो वायाडक्टों के लिए बनाए जा खंभों का निर्माण फिर शुरू हो गया है।
सितंबर में झील का जलस्तर बढ़ने के बाद लुहणू घाट, नाले का नौण और सांडू मैदान में वायाडक्ट (पुल) के लिए बनाए जा रहे निर्माणाधीन पिलर जलमग्न हो गए थे, इस कारण उनका निर्माण बंद करना पड़ा था। आम तौर पर झील का जलस्तर फरवरी में कम होना शुरू होता है। लेकिन इस बार बारिश कम होने से जलस्तर अधिक बढ़ा ही नहीं और नवंबर में ही काफी नीचे भी चला गया। समय से पहले जलस्तर कम होने का लाभ वायडक्टों का निर्माण कर रही कंपनी को मिला है। जलमग्न हुए निर्माणाधीन पिलर बाहर निकल आए हैं। संबंधित कंपनी ने संपर्क मार्ग का निर्माण करके एक बार फिर से खंभों का निर्माण शुरू कर दिया है। बता दें कि बिलासपुर शहर के पास झील और उसके आसपास 69 पिलरों पर दो वायाडक्ट का निर्माण करके रेल ट्रैक तैयार किया जाएगा। एक वायाडक्ट 43 पिलरों पर बनेगा, जो 1,471 मीटर लंबा होगा। दूसरा वायाडक्ट 890 मीटर लंबा होगा, यह 26 पिलरों पर बनाया जा रहा है। संबंधित कंपनी को इस निर्माण को पूरा करने में 30 माह का समय रेल विकास निगम ने दिया है। मार्च 2025 तक रेल लाइन को बिलासपुर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। संबंधित कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि तय समय में निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
बिलासपुर में गोबिंद सागर झील के किनारे बनाए जा रहे रेल लाइन के वायाडक्ट । संवाद