चार रिमाइंडर के बाद भी नहीं मिली रिपोर्ट, मुआवजा व फोरलेन प्रकरण पर उठे सवाल
एक ही मकान की दो अलग-अलग व्यक्तियों ने एनएचएआई के नाम की थी सेल डीड
आज तक उक्त मकान को ध्वस्त कर एनएचएआई को नहीं मिला है कब्जा
ग्राम पंचायत औहर के निवर्तमान उप प्रधान ने दी थी दूसरी पंचायत में जाकर मकान ध्वस्त होने की रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत औहर के निवर्तमान उप प्रधान की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर उठे विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है। जिला पंचायत अधिकारी, बिलासपुर ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है और लंबित रिपोर्ट शीघ्र भेजने के निर्देश देने की मांग की है।
जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कार्यालय के पत्र संख्या बीएलपी पंच/औहर/2025-10529 दिनांक 27 अगस्त 2025 के माध्यम से परियोजना निदेशक एनएचएआई, परियोजना कार्यान्वयन इकाई मंडी से रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बावजूद आज तक उक्त रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इस दौरान संबंधित कार्यालय को चार स्मरण पत्र भी भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद 16 मार्च 2026 को क्षेत्रीय प्राधिकारी, एनएचएआई शिमला को भी पत्र लिखकर परियोजना निदेशक मंडी को आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। जिला पंचायत अधिकारी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि परियोजना निदेशक, एनएचएआई मंडी से प्राप्त होने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही मामले में आगामी कार्रवाई की जानी है और इसकी वस्तुस्थिति पंचायती राज विभाग, हिमाचल प्रदेश को भेजी जानी है। ऐसे में अब यह मामला सीधे एनएचएआई के अध्यक्ष, सेक्टर-10 द्वारका, नई दिल्ली स्थित प्रधान कार्यालय तक पहुंचा दिया गया है। बता दें कि मौजा बकरोआ, तहसील घुमारवीं का यह मामला कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण से जुड़ा है। वर्ष 2014 में एक ही मकान की दो अलग-अलग व्यक्तियों ने आरओडब्ल्यू के बाहर जाकर एनएचएआई के नाम सेल डीड की थी, लेकिन आज तक उक्त मकान को ध्वस्त कर एनएचएआई को कब्जा नहीं दिया जा सका है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ग्राम पंचायत औहर के निवर्तमान उप प्रधान ने दूसरी पंचायत ग्राम पंचायत बकरोआ के मामले में हस्तक्षेप करते हुए गलत रिपोर्ट दी, जिसमें मकान को मौके पर ध्वस्त बताया गया। जबकि मकान मालिक ने ग्राम पंचायत बकरोआ के माध्यम से अपने बयान भेजकर स्पष्ट किया कि मकान मौके पर मौजूद है। शिकायत व छानबीन के बाद निवर्तमान उप प्रधान को दोषी पाया गया और जिला पंचायत अधिकारी की ओर से चेतावनी जारी की गई कि भविष्य में इस प्रकार की कोई भी कार्रवाई होने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
मामले में जिला पंचायत अधिकारी ने परियोजना निदेशक, एनएचएआई मंडी से दो अहम बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। पूछा था कि क्या एनएचएआई के नियमों में पंचायत जनप्रतिनिधियों के बयानों के आधार पर फोरलेन प्रभावितों को मुआवजा देने का प्रावधान है, और क्या संबंधित मामले में मुआवजा तत्कालीन उपप्रधान के बयान के आधार पर जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि मुआवजा नहीं दिया गया है तो प्रभावित परिवार को भुगतान की तिथि उपलब्ध करवाने के निर्देश भी मांगे गए हैं। जानकारी के अनुसार तहसील घुमारवीं में ऐसे 17 से 21 अन्य मामलों में भी अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है, जिनमें भूमि, मकान व पेड़ों के मुआवजे से जुड़ा बड़ा वित्तीय मामला सामने आ सकता है। बताया जा रहा है कि यदि इस बार भी संबंधित विभाग से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मामला उच्च न्यायालय तक ले जाया जा सकता है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति का कहना है कि यह करदाताओं के पैसे से जुड़ा मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।