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Bilaspur News: डॉक्टर अब हड़ताल के दौरान नहीं करेंगे रूटीन के ऑपरेशन

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-52 दिन की हड़ताल के बाद भी सुनवाई न होने पर लिया सख्त निर्णय
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-महाशिवरात्रि के अवकाश के बाद दोबारा ढाई घंटे की पेनडाउन हड़ताल पर लौटे चिकित्सक

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। जिले के सभी चिकित्सक वीरवार को सामूहिक अवकाश और शुक्रवार की महाशिवरात्रि की छुट्टी के बाद तीसरे दिन शनिवार को अस्पताल पहुंचे। सभी चिकित्सक 12 बजे तक ढाई घंटे की पेन डाउन हड़ताल पर रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उन्होंने गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से प्रदान कीं। चिकित्सकों ने निर्णय लिया है कि सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक कोई भी चिकित्सक रूटीन के ऑपरेशन नहीं करेगा।
एनपीए सहित अन्य मांगों को लेकर चिकित्सकों में गुस्सा फूटने लगा है। हिमाचल प्रदेश चिकित्सा संघ के तत्वावधान में पिछले 52 दिनों से संघर्ष कर रहे चिकित्सकों ने पहले तो काले बिल्ले लगाकर रोष प्रकट किया, जब सरकार द्वारा मांगें न माने जाने पर ढाई घंटे की पेन डाउन हड़ताल शुरू कर दी। वीरवार को सभी चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर भी रहे। हालांकि उस दिन कैबिनेट की बैठक भी थी और चिकित्सकों को उम्मीद थी कि कैबिनेट में कोई निर्णय लिया जाएगा। कैबिनेट में उनके लिए कुछ न किए जाने से अब डॉक्टर और अधिक आक्रोशित हो गए हैं। संघ का कहना है कि लगभग डेढ़ माह बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
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चिकित्सक संघ जिला बिलासपुर के महासचिव डॉक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि पहले डॉक्टर ढाई घंटे की पेन डाउन हड़ताल पर थे। हड़ताल के दौरान सभी चिकित्सक आपातकालीन सेवाएं दे रहे थे। इस दौरान रुटीन के ऑपरेशन भी किए जा रहे थे, लेकिन अब साढ़े 9 से 12 बजे तक कोई भी चिकित्सक रूटीन के ऑपरेशन नहीं करेगा। लोगों को अब इसके लिए 12 बजे तक इंतजार करना पड़ेगा।
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बताते चलें कि डॉक्टर एनपीए समेत अन्य मांगें पूरी न होने के विरोध में पिछले 52 दिनों से हड़ताल पर है। ढाई घंटे की पेन डाउन हड़ताल पर जाने के कारण ओपीडी पूर्णता बंद रहती है। दोपहर 12:00 बजे के बाद ही मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो पाती हैं। ओपीडी बंद होने के चलते मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। संघ का कहना है कि सरकार ने आपदा के दौरान एनपीए बंद किया, डॉक्टरों की पदोन्नति भी रुकी पड़ी है। मुख्यमंत्री के साथ भी बैठक हो चुकी है, लेकिन अभी तक उनकी मांगों पर कोई गौर नहीं किया गया है। अगर सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो संघ और अधिक कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर हो जाएगा।
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