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Bilaspur News: जिला अदालत ने एनएच अधिग्रहण विवाद में बरकरार रखा मध्यस्थता का फैसला

Sat, 27 Sep 2025 05:35 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर

सार

बिलासपुर जिला अदालत ने बिलासपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में संपत्ति अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा विवाद में आर्बिट्रेटर के फैसले को वैध ठहराया। अदालत ने मुआवजे, ब्याज और सोलटियम देने का आदेश बरकार रखा। इस निर्णय से भविष्य के मामलों के लिए मिसाल बनी है।
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अदालत से
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संपत्ति मूल्यांकन, प्लिंथ एरिया रेट, ब्याज, सोलटियम सहित मुआवजा वैध, चुनौती खारिज
कोर्ट ने कहा-आर्बिट्रेटर ने सही तरीके से किया मूल्यांकन, सार्वजनिक नीति का नहीं कोई उल्लंघन
घर के अधिग्रहण मूल्य में अनुचित कटौती के मामले को लेकर कोर्ट में गया था मामला

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला अदालत बिलासपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत संपत्ति अधिग्रहण से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह मामला एक अधिग्रहित घर के मुआवजे और मूल्यांकन को लेकर था। एक अधिग्रहित घर के मालिक ने यह दावा किया था कि उनके घर के अधिग्रहण मूल्य में अनुचित कटौती की गई है। उनका कहना था कि आर्बिट्रेटर ने प्लिंथ एरिया रेट गलत तरीके से लागू किए और पेश की गई भवन मूल्यांकन रिपोर्ट को उचित तरीके से नहीं माना।
मालिक का तर्क था कि संरचना की उम्र और मूल्यांकन में अनुचित कटौती की गई है और सुप्रीम कोर्ट, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा पेश की गई विशेषज्ञ रिपोर्ट में भवन के निर्माण सामग्री और लागत का पूरी तरह विवरण दिया गया था, जिसे आर्बिट्रेटर ने नजरअंदाज किया। वहीं, राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण और भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने तर्क दिया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया कानून के तहत सही ढंग से पूरी की गई और आर्बिट्रेटर ने सभी प्रासंगिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए निर्णय दिया। उन्होंने कहा कि प्लिंथ एरिया रेट का प्रयोग 2012 के अधिसूचित दरों के अनुसार किया गया था, जो कि समय के अनुसार उचित और सभी अधिग्रहित संरचनाओं के लिए समान था। अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद पाया कि आर्बिट्रेटर ने निजी मूल्यांकन रिपोर्ट को इसलिए नहीं माना क्योंकि उसमें सामग्री और लागत का पूरी तरह विवरण और फोटो नहीं थे। जबकि एनएचएआई के मूल्यांकन में 2012 के रेट का सही तरीके से उपयोग किया गया था।
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अदालत ने कहा कि आर्बिट्रेटर ने सही ढंग से बाजार मूल्य का आकलन किया और सभी संबंधित पक्षों के अधिकारों और लाभों का ध्यान रखा। इसलिए अदालत ने पाया कि आर्बिट्रेटर का निर्णय सार्वजनिक नीति के खिलाफ नहीं है और इसे खारिज करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि संपत्ति अधिग्रहण मामलों में आर्बिट्रेटर के निर्णय में केवल सीमित परिस्थितियों में ही संशोधन संभव है और इस मामले में आर्बिट्रेटर का निर्णय पूरी तरह से वैध और न्यायसंगत पाया गया। मुख्य निर्णय में अदालत ने कहा कि आर्बिट्रेटर का 26 जुलाई 2022 का पुरस्कार बरकरार रहेगा। मालिक को सभी वैधानिक लाभ, ब्याज और सोलटियम प्राप्त होंगे। अधिसूचना प्रकाशन की तिथि से 12 फीसदी वार्षिक दर से ब्याज लागू होगा। किसी अतिरिक्त लागत या फीस का आदेश नहीं और सभी लंबित आवेदन खारिज किए। इस फैसले से बिलासपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में संपत्ति अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण के मामलों में एक स्पष्ट मिसाल कायम हुई है।
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