-कोटला पंचायत के पटवारखाना में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला(बिलासपुर)। ईश्वर के हाथों से जिन्हें मौत मिलती है, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। सदर खंड की कोटला पंचायत के पटवारखाना में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक देव राज शास्त्री ने छठे दिन श्री कृष्ण की लीला का वर्णन किया।
उन्होंने श्री कृष्ण लीला का वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण छह दिन के थे तो कंस ने अपनी मुंहबोली बहन पूतना को भगवान का वध करने के लिए भेजा। पूतना ने कंस को भरोसा दिलाया था कि वह आसानी से श्रीकृष्ण को मार देगी। पूतना ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए सुंदर रूप बनाया। अपने स्तनों में कालकूट का जहर लगाया, ताकि वह दूध पिलाने के बहाने भगवान कृष्ण को मार सके। इस उद्देश्य से पूतना बाल कृष्ण को मां यशोदा की अनुपस्थिति में उठाकर आकाश में ले गई। जब श्रीकृष्ण को दूध पिलाने लगी तो उन्होंने उसे जोर से पकड़ लिया। श्रीकृष्ण ने कालकूट जहर के साथ पूतना का वध कर उसका उद्धार किया। बताया कि पूतना पूर्व जन्म में राजा बलि की बेटी थी। जब वामन अवतार में भगवान विष्णु ने राजा बलि के पास गए तो बलि की बेटी विष्णु के वामन रूप को देखकर सोचने लगी कि उनका भी उनके जैसा बेटा हो, लेकिन जब वामन अवतार में ईश्वर ने राजा बलि के साम्राज्य को ढाई पग में नाप लिया तो वह बामन रूप में आए विष्णु भगवान के प्रति बदले की भावना से भर गई। विष्णु भगवान ने द्वापर युग में जब अवतार लिया तो राजा बलि की बेटी का ईश्वर को दूध पिलाने की इच्छा के साथ उनका उद्धार किया व पूतना को विष्णु लोक में स्थान मिला।