-श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में शिव महापुराण कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन कथावाचक पंडित सुशील कुमार ने भगवान शिव के अवतारों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में भगवान विष्णु और शिव के कई अवतार हैं। सभी लोग उनकी अलग रूपों में पूजा करते हैं।
ऐसे ही अवतारों में से एक है भगवान शिव का अर्धनारीश्वर अवतार। भगवान शिव का यह अवतार शिव और माता पार्वती का मिला-जुला स्वरूप है। यह अवतार स्त्री और पुरुष दोनों की सम्मिलित ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने बताया कि शास्त्रानुसार इस ब्रह्मांड में सब कुछ अर्धनारीश्वर से ही उत्पन्न होता है और अपने जीवनकाल के पूरा होने के बाद अर्धनारीश्वर में वापस चला जाता है। उन्होंने बताया कि एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि उन्हें शिव में ही समाहित होना है और वह उन्हें ऐसी अनुमति दें। उस समय भगवान शिव जी ने पार्वती माता की यह प्रार्थना स्वीकार की और तब अर्धनारीश्वर स्वरूप का अवतरण हुआ। उन्होंने बताया कि भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप इस बात का प्रतीक है कि पुरुष और स्त्री सिद्धांत अविभाज्य हैं। इसमें से पुरुष सिद्धांत और ब्रह्मांड की निष्क्रिय शक्ति है, जबकि प्रकृति स्त्री सक्रिय शक्ति है। दोनों एक साथ मिलकर ही सृष्टि का निर्माण करते हैं और इसी से ब्रह्माण्ड का निर्माण होता है। स्त्री और पुरुष एक दूसरे की शक्ति के बिना अधूरे हैं और उनकी ऊर्जा भी अर्थहीन है। ऐसा माना जाता है कि यदि लोग भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की पूजा करते हैं तो उससे पूजा का दोगुना फल मिलता है। मंदिर पुजारी पंडित बाबू राम शर्मा ने बताया कि कथा समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।