बिलासपुर। जिले में डेंगू ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके बचाव के लिए पूर्व तैयारी कर ली है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि लोगों को डेंगू से बचने के लिए जागरूक रहने की आवश्यकता है। डेंगू के रोगियों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जा रही हैं। लोगों को साफ -सफाई और डेंगू मच्छरों के पैदा होने वाले स्थानों की रोकथाम के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि डेंगू कुछ साल पहले बिलासपुर में फैला था। इस साल अक्तूबर महीने से शहर के डियारा वार्ड में डेंगू के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से बचाव के लिए फौगिंग करवाई जा रही है। वर्तमान में जिला में 42 डेंगू रोगी उपचाराधीन है। डेंगू अधिकतर एडीस नामक मादा मच्छर के काटने पर फैलता है। एडीस मादा मच्छर डेंगू से ग्रसित व्यक्ति को काटकर आठ से दस दिनों में खुद संक्रमित हो जाती है। जब वह स्वस्थ व्यक्ति को काटती है तो संक्रमण से व्यक्ति का चेहरा लाल, उच्च बुखार, मांसपेशी और जोड़ दर्द, आंखो में दर्द, गले और छाती पर लाल चकत्ते, मितली और उल्टी आनी शुरू हो जाती है। ऐसे में शीघ्र डॉक्टर से संपर्क करें। पांच से सात दिन में सामान्य उपचार से रोगी ठीक हो जाता है। डेंगू के एक से अधिक विषाणुओं के संक्रमण से अति तीव्र रक्तन्नवी डेंगू बुखार हो जाता है। जिसमें रोगी के नाक, मसूड़ों और योनि से रक्तस्राव और काले रंग का मल और लाल मूत्र आने के लक्षण प्रकट होते हैं। ऐसे में रोगी को तुरंत नजदीकी अस्पताल में दाखिल करवाने की जरूरत होती है अन्यथा यह स्थिति घातक हो जाती है।
ग्लोबल वार्मिंग, अनियोजित शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि, मच्छर नियंत्रण के लिए कमजोर अभियान और कमजोर कूड़ा कचरा व्यवस्था से डेंगू बुखार के प्रसार में हर वर्ष वृद्धि हो रही है। इससे बचाव के लिए पानी की टंकी के हवा निकासी पाइप पर जाली लगाएं। पक्षियों को पानी पिलाने वाले बर्तन को प्रतिदिन साफ कर दोबारा पानी भरें। गमलों और मनी प्लांट आदि के पौधों का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें। खुले में पड़े पुराने बर्तनों, टायरों और ट्यूबों में पानी न भरने दें। कू लरों को सप्ताह में दोबारा पानी भरने से पहले अच्छी तरह पोंछ और सूखा कर ही पानी डालें। दिन के समय मच्छरों से काटे जाने से बचाव के लिए पूरे बाजू वाले कपड़े पहनें। डेंगू का कोई विशेष उपचार नहीं है, रोगी को लक्षण के आधार पर दवा की जरूरत होती है। शरीर के तापमान को कम करने के लिए पैरासिटामोल का प्रयोग करें। दर्द निवारक दवाई का सेवन न करें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें। किसी प्रकार का बुखार होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाएं।