कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी ग्रीन ट्रिब्यूनल के बार-बार फटकार लगाने के बावजूद वन क्षेत्र में अवैध डंपिग कर रही है। वन विभाग की ओर से उक्त कंपनी को जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके बावजूद कंपनी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है।
वन विभाग ने स्वारघाट वन परिक्षेत्र के तहत सुन्हण, जब्बल, मैहला, डडनाल में कंपनी की ओर से की जा रही अवैध डंपिंग के मामले में 60 हजार 200 रुपये का जुर्माना लगाया है। विभाग के मुताबिक कंपनी ने वन क्षेत्र में 21 मीट्रिक टन मिट्टी फेंकी है। जिस पर वन विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की है।
सुन्हण के पास कंपनी ने वन भूमि ने 12 मीट्रिक टन, जब्बल में दो मीट्रिक टन, मैहला में चार मीट्रिक टन और डडनाल में तीन मीट्रिक टन मिट्टी को डंप किया है। यहां से यह मिट्टी सतलुज नंदी में समा रही है। इससे मछली उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि कंपनी लगातार जंगलों, सतलुज नदी, नालों, सरकारी भूमि और बिना निशानदेही की निजी भूमि को तबाह कर रही है। पहले भी इस तरह के जुर्माने कंपनी पर लगाए जा चुके हैं। लेकिन, कंपनी मनमानी करने से बाज नहीं आ रही है।
गौरतलब है कि फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी को पहले भी अवैध डंपिंग पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। यहां तक कि कंपनी को विभाग ने हजारों रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके बावजूद कंपनी अवैध डंपिंग से बाज नहीं आ रही है। इस मामले को लेकर स्थानीय लोग भी कई बार कंपनी के खिलाफ आवाज बुलंद कर चुके हैं। साथ ही लोगों ने चक्का जाम भी किया था। लेकिन, कंपनी लगातार ग्रीन ट्रिब्यूनल और वन विभाग के फैसले की अवहेलना कर रही है। इसके चलते कंपनी को जुर्माना लगाया गया है।
फोरलेन कंपनी को जुर्माना लगाया गया है। पहले भी कंपनी को हजारों रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। साथ ही अवैध डंपिंग को लेकर चेतावनी भी दी गई थी।
अनिल जोशी, वन अरण्यपाल