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कंपनी के फायदा के लिए डीसी के नाम पर कर दी फर्जी निशानदेही

Mon, 19 Sep 2016 11:12 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिलासपुर।
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crime demo - फोटो : MID DAY
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निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए एक कानूनगो ने उपायुक्त के नाम का हवाला देकर गैर कानूनी रूप से निशानदेही कर डाली। मामला फोरलेन निर्माण से किसानों की बची हुई जमीन को लेकर था।
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कानूनगो के इस कारनामे से क्षेत्र के 32 ग्रामीण अपनी ही जमीन के लिए आज भी भटकने को मजबूर हैं। डीआरडीओ ने पूरे मामले में कानूनगो को तीन कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए हैं।  मगर अभी तक वह इस बारे में कोई जवाब नहीं दे पाया है। डीआरडीओ ने साफ कहा है कि अगर इस बार कानूनगो ने इस आखिरी नोटिस का जवाब नहीं दिया तो मामला उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेज दिया जाएगा।
 
आरटीआई से सूचना लेने पर सामने आया फर्जीवाड़ा
मामला उस समय सामने आया जब फर्जी तरीके से हुई निशानदेही के बाद अपनी जमीन गवां चुके लोगों ने आरटीआई के तहत विभाग से जानकारी मांगी। जानकारी के अनुसार जिला के मौजा कल्लर में तत्कालीन कानूनगो ने निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तत्कालीन उपायुक्त रही मानसी सहाय का नाम लेकर करीब 32 ग्रामीणों के जमीन की फर्जी निशानदेही कर दी थी।
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इसके बाद आरटीआई से रिपोर्ट मांगी गई तो उसमें उपायुक्त कार्यालय इस संबंध में कोई आदेश जारी न होने की जानकारी दी गई। इसके बाद मामला उपायुक्त के पास पहुंचा था। उन्होंने इस बारे में नियम अनुसार शिकायत दर्ज करवाने को कहा था। इसके बाद इस संबंध में मदन लाल महासचिव फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने इस बारे में शिकायत दर्ज करवाई।

तीन कारण बताओ नोटिस में एक का भी जवाब नहीं दे पाया
इसके बाद कानूनगो को 17.5.2016 को पहला 27.5.2016 को दूसरा और 02.07.2016 तीसरा नोटिस जारी किया गया। मगर कानूनगो की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद अब डीआरओ ने 3.09.2016 को अंतिम नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा था। मगर उस नोटिस का भी अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

डीआरओ कविता ठाकुर ने बताया कि डीसी के नाम पर कानूनगो के फर्जी निशानदेही के मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष आगामी कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।

अपनी ही जमीन मांगने पर 16 के खिलाफ कर दी एफआईआर
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महा सचिव मदन लाल का कहना है कि प्रभावितों के साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने 32 ग्रामीणों ने जब अपनी शेष बची निजी भूमि की मांग की तो 16 लोगों, जिनमें 6 महिलाएं हैं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई। जबकि कुछ कोर्ट के चक्कर काट रहे है। लेकिन हैरत की बात यह है कि जिस अधिकारी ने उपायुक्त का नाम लेकर ग्रामीणों का गुमराह किया वह नोटिस का जवाब तक नहीं दे रहा है। वहीं विभाग भी उसे मौके पर मौके दिए जा रहा है।
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