विकास खंड झंडूता में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की झंडूता बैहरन-पेयजल योजना विवादों में आ गई है। पेयजल योजना का जल स्तर बढ़ाने के लिए साढे़ सात लाख की लागत बनाई गई अमरोआ के समीप खड्ड में बनाई जा रही अस्सी मीटर आरसीसी दीवार (डाइक) निर्माण पूरा होते ही ढह गई है। इससे निर्माण कार्य पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
वहीं विभाग ने मामले पर संज्ञान लेते ही ठेकेदार की पेमेंट पर रोक लगा दी है और रिकवरी करने की बात कह रहा है। आईपीएच विभाग भी मान रहा है कि निर्माण कार्य में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि 2-2-2015 को झंडूता के एक ठेकेदार को सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने टेंडर नंबर 19438-53 के तहत 7,38,002 रुपये का कार्य आवंटित किया था। इसमें 50 क्विंटल सरिया सहित सरकारी सीमेंट भी ठेकेदार को उपलब्ध करवाया गया था।
झंडूता बैहरन पेयजल योजना के वाटर लेवल को ऊंचा और रिचार्ज करने के उद्देश्य अमरोआ के समीप खड्ड में अस्सी मीटर लंबी और 3.25 मीटर ऊंची आरसीसी डाइक का निर्माण किया जाना था।
आरोप है कि ठेेकेदार ने कार्य विभाग की बिना देखरेख के ही शुरू कर दिया गया और निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों को पूरा नहीं किया गया। यही वजह है कि हाल ही में तैयार की गई आरसीसी की डाइक खड्ड में जल स्तर के थोड़ा सा बढ़ने पर ही ढह गई।
इससे कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय अधिकारी के अनुसार ठेकेदार को उन्होंने कहा था कि वह जब भी सीमेंट और सरिये का कार्य शुरू करेगा तो विभाग को बता कर करेगा लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि उक्त ठेकेदार को पैसों की कोई भी अदायगी नहीं की गई है और न ही की जाएगी।
ठेकेदार ने किया घटिया सामग्री का इस्तेमाल : जेई : इस संदर्भ में जब सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता राजकुमार शर्मा और कनिष्ठ अभियंता मुस्ताक अली से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने घटिया सामग्री का प्रयोग कर डाइक को बनाया गया था जोकि गिर चुकी है। उन्होंने बताया कि उक्त ठेकेदार को कार्य को दोबारा नए सिरे से बनाए जाने के लिए कह दिया गया है। ठेकेदार कार्य को नहीं करता है तो उससे सीमेंट और सरिया की रिकवरी सहित अन्य कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जल स्तर गिरने से 10 हजार की आबादी पर संकट : खड्ड में लगातार हो रहे अवैध खनन से इस पेयजल योजना में पानी की कमी आ रही थी। इसको देखते हुए विभाग ने खड्ड में (डाइक) यानि आरसीसी की दीवार बनाकर पानी को रोकने की योजना बनाई थी ताकि पानी को रोककर जलस्तर को बढ़ाया जा सके। मगर काम में हुई भारी कोताही के कारण झंडूता और बैहरन की करीब दस हजार की आबादी पर भी जल संकट गहरा गया है।