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अवैध रूप से डंपिंग पर 50,400 जुर्माना

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पिथौरागढ़-तवाघाट एनएच पर पिनौड़ीगाड़ में मलबा हटाती जेसीबी - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान मक डंपिंग को लेकर वन विभाग मंडी ने कड़ा रुख अपनाया है। अवैध रूप से मक डंपिंग करने पर एनएचएआई को 50 हजार 400 का जुर्माना लगाया गया है। वहीं मलबा मौके पर से हटाने के आदेश भी दिए हैं। अगर मौके पर से मलबा नहीं हटाया गया तो आईएफए के तहत प्राथमिकी दर्ज कर काम को बंद किया जाएगा। वहीं इस मामले में जुर्माना न भरने पर एक बार फिर से एनएचआई को नोटिस जारी किया गया है।
इस पूरे मामले का खुलासा आरटीआई से प्राप्त जानकारी से हुआ है। वहीं वन विभाग ने कौफर डैम में कंपनी की ओर से कितनी मिट्टी डाली गई है उसकी भी वन विभाग ने पूरी रिपोर्ट मांगी है। इस में बताना होगा की कुल कितने कौफर डैम बनाए गए हैं। यह कौफर डैम कहां-कहां बनाए गए हैं और इनकी मिट्टी कंपनी कब हटाएगी। यह जानकारी तत्काल दी जाए।
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उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान कंपनी ने सुंदरनगर और बिलासपुर के साथ सटे क्षेत्र गमौहू और गासी नाला में 140 क्यूविक मीट्रिक टन मिट्टी को डंप किया था। जो मिट्टी गोबिंदसागर झील में जा रहीं है। इस पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने सूचना के अधिकारी से जानकारी मांगी थी कि अवैध रूप से हो रही डंपिंग जिससे क्षेत्र में नुकसान हो रहा है पर क्या कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने उक्त आदेश जारी किए हैं।
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वन विभाग वन मंडल अधिकारी सुंदर नगर के कार्यालय से जारी पत्र संख्या 6615 दिनांक 12.9.2018 में कहा गया है कि कंपनी को तत्काल मिट्टी हटाने को कहा गया है। अगर मिट्टी न हटाई गई तो वन अधिनियम के तहत प्राथमिकता दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी जिसकी पूरी जिम्मेवारी एनएचएआई की होगी क्योंकि पत्र में विभाग ने साफ किया है कि जो भी कंपनी कार्य कर रही है वह एनएचएआई के अधीन है।
 
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