बिलासपुर। जिला अस्पताल की ओपीडी में जांच करवाने से पहले अब कोरोना टेस्ट करवाना होगा। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही ओपीडी में जांच करवा सकेंगे। कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के लिए जिला अस्पताल में यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एम्स के चिकित्सकों की सेवाएं जिला अस्पताल में शुरू होने के बाद लोगों की भीड़ लग रही है।
एमएस का कार्यभार संभालते ही शिशु विशेषज्ञ डॉक्टर सतीश शर्मा ने लोगों को कोविड से बचाने के लिए कार्य करना शुरू कर दिया है। जिला अस्पताल में इन दिनों ओपीडी 600 से ज्यादा जा रही है। ऐसे में ओपीडी के बाहर लोगों की भीड़ लगती है। बीमार बच्चों को लेकर लोग अस्पताल लेकर आ रहे हैं। ऐसे में अगर कोई संक्रमित ओपीडी की लाइन में खड़ा होता है तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। इसी से बचाव के लिए अस्पताल प्रबंधन ने ओपीडी में जाने के लिए कोविड टेस्ट आवश्यक कर दिया है। रैपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही ओपीडी में जाने की इजाजत मिल रही है। यह व्यवस्था शुक्रवार से शुरू हो गई है।
जिले की करीब चार लाख आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला अस्पताल पर निर्भर है। एम्स के चिकित्सकों की सेवाएं शुरू होने के बाद पीजीआई और शिमला जाने वाले लोग भी जिला अस्पताल का ही रुख करने लगे हैं। ऐसे में अस्पताल में लोगों का तांता लग रहा है।
तीसरी लहर से लोगों को बचाने के लिए जिला अस्पताल प्रबंधन ने नई प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल की किसी भी ओपीडी में जाने से पहले मरीज को कोरोना टेस्ट करवाना होगा। बिना कोरोना टेस्ट ओपीडी में प्रवेश नहीं मिलेगा। शुक्रवार को लोग कोविड टेस्ट करवाकर ही ओपीडी में जांच करवाने के लिए जा रहे थे।
जिला अस्पताल के एमएस डॉक्टर सतीश शर्मा ने बताया कि कोरोना दूसरी लहर तो थम गई है, लेकिन तीसरी लहर से बचाव के लिए हमें अभी से एहतियात बरतनी होगी। जिला अस्पताल में मरीजों का तांता लगा रहता है। कौन पॉजिटिव है और कौन नहीं इसका कोई पता नहीं चल पाता। छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। इनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया शुरू की गई है। ताकि अगर कोई कोरोना पॉजिटिव हो तो इसका ओपीडी के बाहर ही पता चल सके।